राज्यमंत्री का भाई 46 किलो गांजे के साथ गिरफ्तार—प्रदेश में नशा नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई
मध्यप्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के परिजन एक बार फिर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर सुर्खियों में हैं। उत्तर प्रदेश में पूर्व में उनके जीजा शैलेंद्र सिंह की गिरफ्तारी के बाद अब सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र में राज्यमंत्री के सगे भाई के पकड़ में आने से राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
● 46 किलो गांजा बरामद, दो आरोपी गिरफ्तार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रामपुर बाघेलान थाना पुलिस ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए 46 किलो गांजे के साथ अनिल बागरी को गिरफ्तार किया है। अनिल बागरी, राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का सगा भाई बताया जा रहा है, जो भरहुत नगर, हरदुआ क्षेत्र निवासी है। पुलिस ने उसके साथ पंकज सिंह, निवासी मतहा, को भी दबोचा है। दोनों आरोपी वाहन में अवैध मादक पदार्थ लेकर कहीं जाने की फिराक में थे, तभी पुलिस ने घेराबंदी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
● इससे पहले जीजा भी पकड़ा गया था 10 किलो 400 ग्राम गांजे के साथ
इससे पहले उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के नरैनी थाना क्षेत्र में राज्यमंत्री के जीजा शैलेंद्र सिंह को पुलिस ने 10 किलो 400 ग्राम गांजे के साथ गिरफ्तार किया था। ताजा गिरफ्तारी के बाद पुलिस को आशंका है कि शैलेंद्र सिंह इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क में अब भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में वह फरार बताया गया है और उसकी तलाश में पुलिस की टीम लगातार छापेमारी कर रही है।
● अंतरराज्यीय गैंग होने की आशंका, पुलिस कर रही गहन जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह तस्करी का नेटवर्क बड़े स्तर पर सक्रिय होने की संभावना है। गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन, वाहन, संपर्क सूत्रों और कॉल रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। पुलिस का लक्ष्य है कि पूरे गिरोह की कड़ियों को उजागर किया जाए।
● क्षेत्र में राजनीतिक हलचल, पूर्व विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
इस पूरे मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में खलबली मचा दी है। पूर्व विधायक कल्पना वर्मा ने इस घटना को लेकर राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी पर गंभीर आरोप लगाए हैं और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
विंध्य वसुंधरा समाचार की पूर्व चेतावनी भी हुई सच
विंध्य वसुंधरा समाचार ने पूर्व में कई बार प्रकाशित किया था कि रीवा संभाग में सफेदपोश नेताओं के करीबियों द्वारा अवैध नशीले व्यापार को संरक्षण मिल रहा है—चाहे वह मेडिकल नशा हो, अवैध शराब हो या गांजा।
हालाँकि रीवा संभाग के आईजी गौरव राजपूत द्वारा पिछले कुछ महीनों में जिस प्रकार लगातार सख्त कार्रवाई की गई है, वह वाकई सराहनीय है। उनकी कार्यशैली से यह स्पष्ट हुआ है कि जब शीर्ष अधिकारी कड़े इरादे से कार्रवाई करते हैं, तो निचले स्तर पर किसी भी प्रकार का राजनीतिक दबाव प्रभावी नहीं हो पाता।
इस घटना ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि सत्ता या पहुंच चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, कानून के सामने कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता। आईजी राजपूत की कार्रवाई से नशा माफिया के नेटवर्क की कमर टूटने की शुरुआत हो चुकी है।
यदि विपक्ष द्वारा उठाई गई मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले समय में राजनीतिक प्रभाव के दुरुपयोग पर और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।


