चौरहटा थाने की प्रताड़ना से टूट चुकी युवती ने SP ऑफिस में मांगी इच्छा मृत्यु
बोली— फर्जी FIR ने मेरी पढ़ाई, सम्मान और भविष्य सब कुछ खत्म कर दिया
रीवा। जिले से एक बेहद संवेदनशील, चिंताजनक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। क्षेत्र की एक युवती ने पुलिस पर गंभीर प्रताड़ना और फर्जी आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आरोप लगाते हुए सीधे पहुंचकर इच्छा मृत्यु की मांग कर दी। युवती की इस भावुक और दर्दनाक गुहार ने पूरे कार्यालय परिसर को स्तब्ध कर दिया।
एक साल बाद नोटिस से हुआ फर्जी FIR का खुलासा
ग्राम जोंहि निवासी भावना मिश्रा ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए आवेदन में बताया कि उसके खिलाफ मारपीट का एक मामला दर्ज किया गया, जिसकी जानकारी उसे करीब एक साल बाद कोर्ट से जारी नोटिस मिलने पर हुई। पीड़िता का कहना है कि 14 नवंबर 2025 की जिस घटना का उल्लेख FIR में है, उस दिन वह नियमित रूप से कॉलेज में उपस्थित थी। उसके पास उपस्थिति रजिस्टर, सहपाठियों और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं, जो उसके निर्दोष होने की पुष्टि करते हैं।
भावना ने कहा कि उसे कभी थाने से न तो बुलाया गया और न ही पक्ष जानने की कोई कोशिश की गई, सीधे उसका नाम अपराध में जोड़ दिया गया। इससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया और समाज में उसकी छवि को गहरा आघात पहुंचा।
रिश्तेदार पर गंभीर आरोप, पुलिस पर दबाव का दावा
पीड़िता ने अपने आवेदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसके बुआ का लड़का विजय नारायण द्विवेदी लंबे समय से उसका पीछा कर रहा था और अनावश्यक रूप से परेशान कर रहा था। भावना का आरोप है कि विजय के मौसा चौरहटा थाने में मुंशी के पद पर पदस्थ थे और इसी कारण पुलिस पर दबाव बनाकर उसके नाम पर झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया।
युवती का कहना है कि उसने कई बार मौखिक रूप से अपनी पीड़ा बताने की कोशिश की, लेकिन हर बार उसे नजरअंदाज किया गया। उल्टा पुलिसिया कार्रवाई का भय दिखाकर उसे चुप रहने पर मजबूर किया गया।
“अब जीने की कोई वजह नहीं बची”
SP ऑफिस में फूट-फूटकर रोते हुए भावना मिश्रा ने कहा—
“मैं एक छात्रा हूं, मेरा कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। इस फर्जी FIR ने मेरी पढ़ाई, करियर और सामाजिक सम्मान सब कुछ छीन लिया है। लोग शक की नजर से देखने लगे हैं। अगर अब भी मुझे न्याय नहीं मिला, तो मेरे पास मौत के सिवा कोई रास्ता नहीं बचेगा। या तो पुलिस मुझे मार दे… या मैं खुद मर जाऊँगी।”
युवती की यह बात सुनकर वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी भी कुछ देर के लिए स्तब्ध रह गए।
चौरहटा थाना फिर विवादों में
इस पूरे घटनाक्रम के बाद चौरहटा थाना एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। पूर्व में भी थाने पर मनमानी और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला केवल एक युवती का नहीं, बल्कि पुलिस की जवाबदेही और निष्पक्षता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
SP ऑफिस के रुख पर टिकी निगाहें
फिलहाल युवती का आवेदन पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दर्ज कर लिया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, फर्जी FIR को निरस्त किया जाएगा और यदि पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी या नहीं।
समाजसेवियों और जागरूक नागरिकों ने मामले को गंभीर बताते हुए मांग की है कि
- युवती को तत्काल मानसिक और कानूनी सुरक्षा दी जाए
- फर्जी FIR की उच्चस्तरीय जांच हो
- दोषी पुलिसकर्मियों और दबाव बनाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए
यह मामला अब सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि एक युवती के जीवन और भविष्य को बचाने का सवाल बन चुका है।


