सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रीवा: घटिया निर्माण का घोटाला, जनता की जान पर खेल
रीवा की जनता को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का सपना दिखाकर जिस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को करोड़ों रुपये की लागत से खड़ा किया गया था, वह आज भ्रष्टाचार और मानकविहीन निर्माण का प्रतीक बन चुका है। अस्पताल में आए दिन कभी छत की सीलिंग गिरती है, कभी दीवारें झड़ती हैं और कभी आधा निर्माण भाग ही टूटकर नीचे आ जाता है। हालात ऐसे हैं कि मरीज और उनके परिजन उपचार कराने आएं तो खुद अपनी जान को भी खतरे में डालते हैं।
जल्दबाजी और भ्रष्टाचार से बना मौत का घर
स्थानीय सूत्रों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, अस्पताल का निर्माण गुणवत्ता और मानक की अनदेखी कर केवल व्यक्तिगत श्रेय लेने की जल्दबाजी में कराया गया। ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और कागजों पर सब कुछ सही दिखाकर करोड़ों रुपये का हिसाब निपटा दिया गया। परिणामस्वरूप यह बहुमंजिला इमारत जनता की सेवा करने के बजाय खतरे का केंद्र बन चुकी है।
जिम्मेदारों पर उठते सवाल
जनता का सीधा आरोप है कि अस्पताल निर्माण की निगरानी करने वाले तकनीकी अधिकारी और निर्माण एजेंसी इस आपराधिक लापरवाही के दोषी हैं। साथ ही अधीक्षक डॉ. श्रीवास्तव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। समाजसेवी अधिवक्ता बी.के. माला का कहना है कि—
“यदि अधीक्षक समय रहते निर्माण की खामियों और गिरते हिस्सों की सूचना उच्चाधिकारियों को देते, तो स्थिति इतनी भयावह नहीं होती। लेकिन यहाँ तो पूरा सिस्टम ही भ्रष्टाचार की चादर ओढ़े बैठा रहा।”
जनता की मांग: एफआईआर और सीबीआई जांच
इस मामले में जनता और समाजसेवी संगठनों की मांग है कि—
निर्माण एजेंसी पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो।
दोषी तकनीकी अधिकारियों को निलंबित कर कठोर कार्रवाई की जाए।
अधीक्षक पर विभागीय जांच बैठाई जाए।
पूरे घोटाले की सीबीआई जांच कराई जाए ताकि असली गुनाहगार सामने आएं।
रीवा के विकास मॉडल पर उठे सवाल
बी.के. माला ने तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में बने संजय गांधी अस्पताल ने दशकों तक बिना किसी बड़ी दुर्घटना के बेहतर सेवाएँ दीं। वहीं मौजूदा सरकार के कार्यकाल में बने सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल का ढांचा उद्घाटन के कुछ ही सालों में टूटने लगा है। यह उदाहरण बताता है कि विकास के नाम पर कंक्रीट के जंगल खड़े किए गए, लेकिन उनमें जनता की सुरक्षा और सुविधा की कोई परवाह नहीं की गई।
जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़
रीवा संभाग के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एक वरदान साबित होना चाहिए था, लेकिन यहाँ मरीजों का इलाज तो दूर, भवन की दीवारें और छतें ही गिरने लगी हैं। यह स्थिति इस सवाल को जन्म देती है कि आखिर करोड़ों रुपये की लागत से बने इस अस्पताल की असली जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि किसी दिन बड़ी दुर्घटना घटित होती है तो इसका जवाबदार कौन होगा—निर्माण एजेंसी, तकनीकी अधिकारी, अधीक्षक या सरकार?

