रीवा-गढ़ मार्ग पर बड़ा सवाल: आवारा मवेशियों से हादसों की बाढ़, प्रशासन के आदेश नदारद
रीवा जिले में आवारा मवेशियों की समस्या अब जानलेवा रूप ले चुकी है। 8 सितंबर 2025 दिन सोमवार रात करीब 8 बजे गढ़ से रीवा जा रहे युवक बृजवासी गुप्ता (पुत्र बलभद्र गुप्ता, निवासी गढ़) की मोटरसाइकिल टिकुरी गांव के पास अचानक सड़क पर आए मवेशी से टकरा गई। हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। यह घटना केवल एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण बन गई है।
आदेश जारी, लेकिन अमल शून्य
बीते कुछ माह में रीवा कलेक्टर ने कई बार आदेश जारी किए कि आवारा मवेशियों को सड़कों से हटाकर गौशालाओं या सुरक्षित स्थलों पर रखा जाए। पर हकीकत यह है कि ये आदेश फाइलों और नोटिस बोर्डों तक ही सीमित रह गए हैं। जमीनी स्तर पर न तो कोई प्रभावी कार्यवाही दिखती है और न ही जिम्मेदार अधिकारी सख्त रवैया अपनाते नजर आते हैं। परिणामस्वरूप राष्ट्रीय राजमार्गों से लेकर गांव की पगडंडियों तक, हर जगह मवेशियों का जमावड़ा दुर्घटनाओं को दावत देता है।
बढ़ते हादसों से दहशत
स्थानीय लोगों का कहना है कि गढ़-रीवा मार्ग पर खुले मवेशी हर दिन हादसों की वजह बनते हैं। ग्रामीण और वाहन चालक दहशत में हैं, क्योंकि सड़क पर बैठे या अचानक दौड़ते मवेशियों से टकराने का खतरा हर पल बना रहता है। आए दिन हो रही दुर्घटनाओं ने न केवल लोगों की जान जोखिम में डाल दी है, बल्कि वाहन चालकों की आर्थिक स्थिति पर भी बोझ बढ़ा दिया है।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
जिला प्रशासन और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी है कि सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए और आवारा मवेशियों पर नियंत्रण किया जाए। लेकिन हकीकत यह है कि इस दिशा में गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। आम जनता का सवाल है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या सिर्फ आदेश जारी करना ही पर्याप्त है या फिर ज़मीनी स्तर पर ठोस कदम भी उठाए जाएंगे?
जनता की मांग
ग्रामीणों ने एक स्वर में मांग की है कि आवारा मवेशियों की समस्या पर तत्काल कड़ी कार्रवाई हो। सड़कों पर रोज-रोज होने वाले हादसों को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए। अगर प्रशासन अब भी उदासीन रहा तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है।


