रीवा गढ़ थाना क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार अपने चरम पर है। कंपोजिट शराब की दुकान से गांव-गांव तक दारू की खेप भेजी जा रही है। हाल ही में ग्रामीणों द्वारा लोरी नंबर 1 में शराब की अवैध खेप पकड़ी गई थी, लेकिन पैसे और प्रभाव के दम पर शराब माफिया ने उल्टे ग्रामीणों पर लूट का मुकदमा दर्ज कराने की धमकी दे दी।
माफिया के बुलंद हौसले
शराब माफिया का आतंक न केवल गढ़ क्षेत्र, बल्कि आसपास के गांवों तक फैल चुका है। इस नेटवर्क के हौसले इतने बुलंद हैं कि नईगढ़ी थाना क्षेत्र में भी कंपोजिट शराब दुकान से जुड़े अवैध शराब बिक्री के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ महीने पहले नईगढ़ी पुलिस ने एक आरोपियों को पकड़ा था, जिसमें दो लोग भागने में कामयाब हुए थे। जिनमें गढ़ कंपोजिट शराब दुकान का लाइसेंसधारी और उसका एक सहयोगी शामिल थे। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, लेकिन आरोपी आज भी फरार हैं। दुकान को अब सेल्समैन के भरोसे चलाया जा रहा है।
कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं
गढ़ कंपोजिट शराब दुकान में बुनियादी नियमों का भी पालन नहीं हो रहा।
1. रेट लिस्ट चस्पा नहीं की गई है।
2. ग्राहकों से मनमानी कीमत वसूली जा रही है।
3. जब इस संबंध में लाइसेंसधारी से सवाल किया गया, तो उसने अहंकार भरे लहजे में कहा, "जहां शिकायत करनी है करो, मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा।"
4. पत्रकारों को धमकाते हुए उसने फर्जी मुकदमों में फंसाने की बात कही।
शराब माफिया की गुंडागर्दी
गढ़ कंपोजिट शराब दुकान का नाम कई विवादों में आ चुका है।
कुछ महीने पहले दुकान पर हुए विवाद में मारपीट की घटना सामने आई थी। इसमें कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
माफिया ने उल्टे पीड़ितों पर ही मुकदमे दर्ज करा दिए।
इन घटनाओं से साफ है कि शराब माफिया अपनी ताकत और धनबल के सहारे कानून का मजाक उड़ा रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी और ग्रामीणों की चिंता
यह समझना मुश्किल है कि शराब माफिया का यह गैरकानूनी नेटवर्क किसके संरक्षण में चल रहा है।
क्या यह प्रशासन की लापरवाही है, या फिर माफिया के साथ मिलीभगत?
लगातार बढ़ते अपराधों के बावजूद, पुलिस और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह समस्या क्षेत्र की सामाजिक शांति को पूरी तरह नष्ट कर देगी।
क्या करने की जरूरत है?
1. दुकानों की नियमित जांच: सभी शराब की दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा कराना और मनमानी वसूली पर रोक लगाना जरूरी है।
2. फरार आरोपियों की गिरफ्तारी: शराब माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को जेल भेजा जाए।
3. विशेष अभियान: अवैध शराब के कारोबार को खत्म करने के लिए सघन अभियान चलाया जाए।
4. शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा: ग्रामीणों और पत्रकारों को सुरक्षा दी जाए ताकि वे माफिया के खिलाफ खुलकर आवाज उठा सकें।
5. लाइसेंस रद्द: नियमों का उल्लंघन करने वाली दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं।
निष्कर्ष
गढ़ क्षेत्र में शराब माफिया का बढ़ता वर्चस्व प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर करता है। अगर जल्द ही अवैध शराब के कारोबार पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह समस्या न केवल कानून-व्यवस्था को कमजोर करेगी, बल्कि समाज में भय और अराजकता का माहौल भी पैदा करेगी। प्रशासन को अब अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। ग्रामीणों को उम्मीद है कि यह लड़ाई सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि कानून और न्याय की भी है।

