रीवा और मऊगंज जिलों में डीएपी खाद और बीज की दुकानों पर राजस्व और कृषि विभाग द्वारा हाल में की गई छापामार कार्रवाई ने जिले में हड़कंप मचा दिया है। इस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या यह वास्तव में किसानों के हित में है या केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए की गई? वहीं, किसानों का आरोप है कि नवंबर से ही डीएपी खाद में मिलावट और बीज वितरण में अनियमितता की शिकायतें हो रही थीं, लेकिन प्रशासन ने लंबे समय तक इसे नजरअंदाज किया।
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| यह तस्वीर काल्पनिक है |
डीएपी खाद में मिलावट का मामला
पिछले महीने जब डीएपी खाद 20 नवंबर 2024 को डीएपी खाद की रैक रीवा में आई उसके बाद ताबड़तोड़ छापा मार कार्यवाही चालू की गई। जबकि उसके पूर्व घटिया किस्म की खाद भारी मात्रा में विकी किसानों का कहना है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था, लेकिन प्रशासन की संयुक्त टीमों ने जांच में देरी की।
बीज की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप
खाद के अलावा बीज वितरण में भी भारी अनियमितताओं का आरोप है। किसान बता रहे हैं कि पुराने और एक्सपायर्ड बीजों को नई पैकिंग में डालकर बाजार में बेचा जा रहा है। धान, गेहूं, चना, मसूर और सब्जियों के बीजों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें हैं। खासतौर पर गेहूं के बीजों में मिलावट की चर्चा है।
छापेमारी: केवल दिखावा या सख्त कार्रवाई?
प्रशासन द्वारा की गई छापेमारी के दौरान कई दुकानों पर सेवा शुल्क के नाम पर अवैध वसूली का खुलासा हुआ है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि इस कार्रवाई में केवल छोटे दुकानदारों को निशाना बनाया गया, जबकि बड़े डीलरों और गोदामों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
किसानों की नाराजगी और भय
नाम न छापने की शर्त पर किसानों ने बताया कि वे डर के कारण खुलकर बोलने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि यदि वे इन समस्याओं पर खुलकर शिकायत करेंगे, तो उन्हें खाद और बीज मिलने में दिक्कतें होंगी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन की मिलीभगत से कालाबाजारी जारी है।
कालाबाजारी पर प्रशासनिक सुस्ती
कई जानकारों का कहना है कि 2024 में खाद और बीज वितरण में जितनी छूट दी गई है, वैसी छूट शायद 1947 के बाद पहली बार देखने को मिल रही है। पहले शिकायतों पर दोषियों को सख्त सजा मिलती थी, लेकिन अब कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह गई है।
किसानों की मांग: निष्पक्ष जांच हो
किसानों ने संभागीय आयुक्त और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र टीम गठित की जाए।
1. खाद और बीज की गुणवत्ता की जांच: मिलावट और एक्सपायर्ड बीजों की बिक्री की पुष्टि हो।
2. सेवा शुल्क वसूली की जांच: यह पता लगाया जाए कि अवैध वसूली में कौन-कौन शामिल है।
3. बड़े व्यापारियों पर कार्रवाई: केवल छोटे दुकानदारों तक कार्रवाई सीमित न रहे।
क्या प्रशासन करेगा भरोसा बहाल?
इस घटना ने किसानों और व्यापारियों में प्रशासन के प्रति अविश्वास पैदा कर दिया है। यदि इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल किसानों के अधिकारों का हनन होगा, बल्कि रीवा और मऊगंज जिलों की कृषि उत्पादकता पर भी गहरा असर पड़ेगा।

