रीवा जिले के सोहागी चेक पोस्ट पर परिवहन विभाग की अवैध वसूली:- प्रशासन की निष्क्रियता और सरकार की साख पर कई गंभीर सवाल।
आखिर राज्य और केंद्र की जांच एजेंसियां अनभिज्ञ क्यों है रीवा और मऊगंज जिले में परिवहन विभाग द्वारा लाखों लाख सेवा शुल्क रीवा और मऊगंज के अधिकारी सफेद पोशधारी और आधुनिक सामाजिक कार्यकर्ता जैसे कौन कौन लोग इन काली कमाई के सेवा शुल्क डायरी में नाम दर्ज है।
परिवहन विभाग की अवैध गतिविधियों पर विशेष रिपोर्ट
रीवा जिले के त्यौथर तहसील में स्थित सोहागी पहाड़ चेक पोस्ट, जिसे मध्य प्रदेश सरकार ने आधिकारिक रूप से बंद कर दिया था, आज भी अवैध वसूली का केंद्र बना हुआ है। परिवहन विभाग के अधिकारी और अन्य पुलिस कर्मी, राजनेताओं के संरक्षण में, खुलेआम ट्रक और भारी वाहनों से वसूली कर रहे हैं। यह न केवल सरकारी आदेशों का उल्लंघन है, बल्कि जनता और सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय भी बन गया है।
चेक पोस्ट बंद होने के बाद भी जारी है अवैध वसूली
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी चेक पोस्टों को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन सोहागी चेक पोस्ट पर गतिविधियां जस की तस बनी हुई है। लाल बत्ती लगे आरटीओ वाहनों और खाकी वर्दीधारी कर्मियों की मौजूदगी यह साबित करती है कि यहां सरकारी नियमों को ताक पर रखकर अवैध वसूली की जा रही है।
वाहन चालकों ने बताया कि हर गुजरने वाले ट्रक और अन्य भारी वाहनों से नियमित रूप से वसूली की जाती है। कई ट्रक मालिकों से मासिक "सेवा शुल्क" लिया जाता है, जिससे उनकी गाड़ियां बिना किसी रोक-टोक के चेक पोस्ट पार कर जाती हैं। जिन वाहनों से वसूली नहीं हो पाती, वे सड़क किनारे खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ रहा दुर्घटनाओं का खतरा
राष्ट्रीय राजमार्ग-30 और 35 पर वाहनों की बढ़ती संख्या और अव्यवस्थित यातायात के कारण सड़क दुर्घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। लेकिन परिवहन विभाग की प्राथमिकता सुरक्षा व्यवस्था के बजाय वसूली पर केंद्रित है।
इसके अलावा, टूरिस्ट परमिट के नाम पर चलने वाली अधिकांश बसें बिना अनुमति सवारियों को ढोती हैं। इन बसों की यात्रियों की सूची अक्सर फर्जी होती है, और दुर्घटना की स्थिति में बीमा के लिए हेरफेर की संभावना रहती है।
सोहागी चेक पोस्ट: प्रशासन की नाकामी का प्रतीक
रीवा संभाग के अंतर्गत सोहागी चेक पोस्ट की गतिविधियां प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण को उजागर करती हैं। संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद, इस अवैध गतिविधि पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
मीडिया और जनप्रतिनिधि क्यों हैं मौन?
सोहागी पहाड़ पर चल रही इन गतिविधियों पर समाज के चौथे स्तंभ, यानी मीडिया, और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी सवाल खड़े करती है। बड़े मीडिया घरानों की अनदेखी और विपक्षी नेताओं का मौन इन समस्याओं को और बढ़ावा देता है।
उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्य प्रदेश की स्थिति
उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग के उड़न दस्ते नियमित रूप से आकस्मिक जांच अभियान चलाते हैं, जिससे कानून का पालन सुनिश्चित होता है। इसके विपरीत, रीवा और मऊगंज जैसे क्षेत्रों में ये अभियान केवल नाम मात्र के रह गए हैं और वसूली अभियान का रूप ले चुके हैं।
सोहागी की अवैध वसूली: काला धन किसके पास जा रहा है?
सोहागी पहाड़ के इस अवैध वसूली तंत्र से हर महीने करोड़ों रुपये का काला धन अर्जित होता है। यह पैसा किनकी तिजोरियों में जा रहा है और इसका क्या उपयोग हो रहा है, यह सवाल उठता है। पारदर्शी जांच के बिना इस तंत्र की सच्चाई जनता के सामने लाना मुश्किल है।
प्रमुख सवाल और चिंताएं
1. बंद हो चुके चेक पोस्ट पर परिवहन विभाग की अवैध गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं?
2. इस वसूली में शामिल अधिकारियों और राजनेताओं पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
3. राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात व्यवस्था और सुरक्षा की अनदेखी क्यों हो रही है?
4. क्या विपक्ष, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर मौन हैं?
समस्या का समाधान और सुझाव
1. तत्काल जांच: सोहागी पहाड़ पर हो रही अवैध वसूली की निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए।
2. कठोर दंड: इस अवैध गतिविधि में शामिल अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
3. सड़क सुरक्षा उपाय: राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात नियंत्रण और सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं।
4. पारदर्शिता सुनिश्चित हो: परिवहन विभाग की गतिविधियों में डिजिटल ट्रैकिंग और निगरानी तंत्र लागू किया जाए।
5. सामाजिक जागरूकता: जनता और सामाजिक संगठनों को इन मुद्दों पर आवाज उठानी चाहिए।

