शासकीय विद्यालय की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की माँग
रीवा जिले के गंगेव विकासखंड के ग्राम लौरी नंबर 1 में स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की भूमि पर वर्षों से अतिक्रमण बना हुआ है। यह भूमि आराजी नंबर 861/2 के अंतर्गत है, जिसमें एक एकड़ जमीन विद्यालय भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, शौचालय और खेल मैदान के लिए आरक्षित है। वर्तमान में विद्यालय परिसर का लगभग 10 डिसमिल हिस्सा अतिक्रमणकारियों के कब्जे में है।
अतिक्रमण की शुरुआत और स्थिति
कोरोना काल के दौरान विद्यालय बंद रहने का फायदा उठाते हुए हिंचलाल प्रजापति और उनकी पत्नी शकुंतला प्रजापति ने विद्यालय की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया। कब्जे वाली जमीन पर उन्होंने काटों की वाड़ी लगाकर कच्चा मकान बना लिया है।
अतिक्रमण के कारण विद्यालय में बच्चों की शिक्षा और गतिविधियों में रुकावट आ रही है। विद्यालय की बाउंड्री वॉल का निर्माण रुक चुका है, जिससे बच्चों की सुरक्षा और खेल के अधिकार बाधित हो रहे हैं।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं
विद्यालय प्रबंधन ने अतिक्रमण को हटाने के लिए कई बार प्रयास किए। इस संबंध में कलेक्टर, तहसीलदार, और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार आवेदन दिए गए। शिकायतों और सीमांकन के बावजूद अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
दिनांक 15 नवंबर 2019: आवेदन पत्र क्रमांक 367 तहसील कार्यालय में जमा किया गया।
दिनांक 9 अक्टूबर 2020: अनुविभागीय अधिकारियों को पत्र क्रमांक 374 के तहत शिकायत दी गई।
दिनांक 10 अक्टूबर 2020: जिला प्रशासन को पत्र क्रमांक 378 के माध्यम से अवगत कराया गया।
इसके अतिरिक्त, राजस्व निरीक्षक मंडलगढ़ और नायब तहसीलदार मनगवा द्वारा दो बार सीमांकन किया गया और अतिक्रमणकारियों को जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया। लेकिन अतिक्रमणकारी आदेशों की अवहेलना करते हुए कब्जा बनाए हुए हैं।
विद्यालय को हो रहे नुकसान
1. बाउंड्री वॉल का अभाव: अवैध कब्जे के कारण विद्यालय परिसर की बाउंड्री वॉल का निर्माण अधूरा है। इससे न केवल विद्यालय की सुरक्षा पर सवाल उठता है, बल्कि बच्चों की गतिविधियां भी बाधित हो रही हैं।
2. शिक्षकों और बच्चों पर दुर्व्यवहार: बच्चों की गेंद कब्जे वाली जमीन पर जाने पर अतिक्रमणकारी गाली-गलौज करते हैं। शिक्षकों को धमकी दी जाती है कि उन्हें फर्जी मुकदमों में फंसा दिया जाएगा।
3. आंगनबाड़ी और शौचालय की समस्या: आंगनबाड़ी केंद्र और शौचालय पर अतिक्रमण होने से छोटे बच्चों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
4. खेल के मैदान का अभाव: अतिक्रमण के कारण खेल का मैदान बच्चों के लिए उपयोगी नहीं रह गया है, जिससे उनकी खेल-कूद की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
अतिक्रमणकारियों के बढ़ते हौसले
अतिक्रमणकारी हिंचलाल प्रजापति और उनकी पत्नी द्वारा न केवल अवैध कब्जा किया गया है, बल्कि विद्यालय प्रबंधन और ग्रामीणों को धमकाने का प्रयास भी किया जा रहा है। शिक्षकों और बच्चों पर दुर्व्यवहार किया जाता है, जिससे विद्यालय का शैक्षिक माहौल प्रभावित हो रहा है।
सरकार और प्रशासन की उदासीनता
प्रदेश सरकार के मुखिया और शिक्षा विभाग अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाने के लिए संकल्पित हैं। इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। यह सवाल उठता है कि जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता का कारण क्या है।
समाज और प्रशासन से अपेक्षा
1. अतिक्रमण मुक्त कार्रवाई: प्रशासन को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमणकारियों को हटाकर विद्यालय की भूमि को मुक्त कराना चाहिए।
2. बाउंड्री वॉल का निर्माण: बाउंड्री वॉल का निर्माण शीघ्र किया जाए ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
3. कड़ी कार्रवाई: अतिक्रमणकारियों पर सख्त कार्रवाई कर उदाहरण प्रस्तुत किया जाए।
4. बच्चों का अधिकार: बच्चों के खेल-कूद और शिक्षा के अधिकार को बहाल करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।


