खाद वितरण में अनियमितता, प्रशासनिक आदेशों का जमीनी स्तर पर न उतरना चिंताजनक
रीवा जिले में खाद वितरण को लेकर व्यापक पैमाने पर अनियमितताएं और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आ रही हैं। संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर द्वारा खाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के लिए कई आदेश जारी किए गए हैं। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन होता नहीं दिख रहा है।
ताजा मामला:
दिनांक 6 दिसंबर 2024 को सुबह 10 बजे रामप्रगास यादव, निवासी बहेरा थाना गढ़, ने लौरी मोड़ स्थित एक बीज और खाद की दुकान से दो बोरी खाद खरीदी। इसके लिए उन्होंने दुकानदार को ₹3000 का भुगतान किया, जिसमें से ₹40 उन्हें वापस दिए गए। यह दर्शाता है कि प्रति बोरी ₹1480 की दर से खाद बेची गई, जो निर्धारित मूल्य से अधिक है।
ग्रामीण इलाकों में लगातार शिकायतें:
गढ़ ग्राम पंचायत, तहसील मनगवा जिला रीवा में किसानों द्वारा लगातार शिकायत की जा रही है कि खाद वितरण में पारदर्शिता का अभाव है। प्रशासन द्वारा गोदामों और पीओएस मशीनों से संबंधित डेटा की जांच का आदेश जारी होने के बावजूद अब तक इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है।
किसानों की समस्याएं:
1. कालाबाजारी: खाद के अधिक मूल्य पर बिक्री से किसान आर्थिक रूप से शोषित हो रहे हैं।
2. गुणवत्ता: कई बार खाद की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
3. जानकारी का अभाव: किसानों को यह नहीं पता चल पाता कि उनके क्षेत्र में कौन-सी खाद कब आई और कितनी मात्रा में वितरित की गई।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल:
प्रशासन की निष्क्रियता किसानों के हितों पर गंभीर चोट कर रही है। संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर के निर्देशों के बावजूद, खाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिख रही। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए यह एक विचारणीय विषय है कि किसानों के साथ हो रहे इस अन्याय को कैसे रोका जाए।
आवश्यक कदम:
1. सख्त निरीक्षण: गोदामों और पीओएस मशीनों से संबंधित रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जाए।
2. कालाबाजारी पर रोक: दोषी दुकानदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
3. सूचना का अधिकार: खाद वितरण प्रक्रिया की जानकारी किसानों को समय पर उपलब्ध कराई जाए।
4. जन जागरूकता: किसानों को उनके अधिकारों और खाद के वास्तविक मूल्य के बारे में जागरूक किया जाए।
1947 से लेकर 2024 तक ऐसी लूट नहीं हुई। विज्ञान और तकनीक के इस युग में किसानों के साथ हो रही इस तरह की मनमानी अत्यंत शर्मनाक है। यह स्थिति अन्नदाताओं के साथ अन्याय की पराकाष्ठा है। प्रशासन को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाकर किसानों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। यदि यह स्थिति ऐसे ही बनी रही, तो आने वाले समय में किसान आंदोलन करने को मजबूर हो सकते हैं।

