शासकीय विद्यालयों की भूमि पर अतिक्रमण: प्रशासन की निष्क्रियता और जनता के सवाल
Uploads By Shailendra Mishra
जनपद पंचायत गंगेव ग्राम पंचायत लौरी खुर्द जिला रीवा, मध्य प्रदेश। का मामला
शासकीय विद्यालयों की भूमि पर अतिक्रमण की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इन घटनाओं से न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। रीवा जिले के ग्राम पंचायत लौरी कला (जनपद पंचायत गंगेव, तहसील मनगवा) में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय की भूमि पर अतिक्रमण का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय प्रभावशाली व्यक्तियों ने राजस्व खसरा नंबर 861/2 पर स्थित विद्यालय परिसर पर कब्जा कर लिया है।
इस अतिक्रमण ने विद्यालय के बुनियादी ढांचे और छात्रों की शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण स्थिति और अधिक चिंताजनक हो गई है।
अतिक्रमण की गंभीरता
विद्यालय परिसर की स्थिति अब छात्रों और शिक्षकों के लिए असुरक्षित हो चुकी है।
1. अवैध निर्माण:
अतिक्रमणकारियों ने विद्यालय की बाउंड्री वॉल को तोड़कर अवैध निर्माण कर लिया है।
यह निर्माण परिसर के महत्वपूर्ण हिस्से में हुआ है, जिससे विद्यालय का संचालन बाधित हो रहा है।
2. शौचालय पर कब्जा:
विद्यालय में बच्चों के लिए बनाए गए शौचालयों को निजी उपयोग के लिए कब्जा कर लिया गया है।
इस वजह से छात्रों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है।
3. भविष्य की योजनाओं पर असर:
अतिक्रमण के कारण विद्यालय के किसी भी नए निर्माण या मरम्मत कार्य में बाधा आ रही है।
स्कूल प्रबंधन के लिए मौजूदा संरचनाओं की देखरेख और सुरक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
शिकायतों की अनदेखी: प्रशासन की निष्क्रियता
विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय नागरिकों ने कई बार प्रशासन से अतिक्रमण हटाने की गुहार लगाई है।
20 अक्टूबर 2020
विद्यालय प्रबंधन ने पत्र क्रमांक 374 के माध्यम से जिला कलेक्टर, रीवा को लिखित शिकायत भेजी।
12 अक्टूबर 2023:
राजस्व विभाग, तहसील कार्यालय, और अन्य संबंधित अधिकारियों को औपचारिक पत्र भेजा गया।
स्थानीय नागरिकों का प्रयास:
अभिभावकों और गांववासियों ने मौखिक और लिखित शिकायतों के जरिए अतिक्रमण के खिलाफ आवाज उठाई।
प्रशासन की चुप्पी के कारण:
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि:
1. राजनीतिक संरक्षण:
अतिक्रमणकारियों को राजनीतिक पहुंच हासिल है, जो प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित कर रही है।
2. राजस्व विभाग की निष्क्रियता:
राजस्व अधिकारियों ने शिकायतों को अनदेखा किया है और अतिक्रमण हटाने में कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
3. स्थानीय दबाव:
प्रभावशाली व्यक्तियों के दबाव में प्रशासन कार्रवाई से बच रहा है।
विधायक की प्रतिक्रिया
मनगवा विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति को जब इस अतिक्रमण की जानकारी दी गई, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा:
कानून सबके लिए समान है। चाहे अतिक्रमणकारी मेरा रिश्तेदार ही क्यों न हो, प्रशासन को स्वतंत्र रूप से कार्रवाई करनी चाहिए।"
विधायक ने राजस्व विभाग से सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया और आश्वासन दिया कि प्रशासनिक प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।
यह बयान प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव तो बनाता है, लेकिन सवाल उठता है कि इतने समय तक निष्क्रिय रहने के लिए जिम्मेदार कौन है?
अतिक्रमण से उत्पन्न समस्याएं
1. शिक्षा व्यवस्था बाधित:
विद्यालय परिसर का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की वजह से अनुपयोगी हो गया है।
छात्रों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बनाना कठिन हो गया है।
2. छात्रों की सुरक्षा खतरे में:
परिसर में बाहरी लोगों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं।
3. शैक्षणिक माहौल पर असर:
अतिक्रमण और तनावपूर्ण माहौल के कारण शिक्षकों और छात्रों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
4. भविष्य पर प्रभाव:
सरकारी संस्थानों की जमीनों पर कब्जा जारी रहने से शिक्षा और विकास कार्यों को बाधा पहुंच रही है।
नागरिकों की मांग और समाधान के सुझाव
स्थानीय नागरिक और विद्यालय प्रबंधन निम्नलिखित मांगें कर रहे हैं:
1. तत्काल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई:
जिला कलेक्टर और संभागीय आयुक्त इस मामले को प्राथमिकता से हल करें।
अवैध कब्जे को हटाकर विद्यालय परिसर को सुरक्षित बनाया जाए।
2. राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक:
अतिक्रमणकारियों को संरक्षण देने वाले राजनीतिक प्रभाव को खत्म किया जाए।
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
3. छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो:
विद्यालय में बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल बनाया जाए।
4. प्रशासनिक जवाबदेही:
राजस्व विभाग और तहसील कार्यालय के अधिकारियों को इस मामले में जवाबदेह बनाया जाए।
शासकीय विद्यालयों की भूमि पर अतिक्रमण की समस्या केवल लौरी कला तक सीमित नहीं है। यह समस्या पूरे राज्य में देखने को मिल रही है। प्रशासन की निष्क्रियता और राजनीतिक हस्तक्षेप ने इसे और बढ़ावा दिया है।
सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक संपत्तियों पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो।

