गढ़ ग्राम में उचित मूल्य की दुकान पर अनियमितताएं: हितग्राही खाद्यान्न से वंचित
रीवा जिले के मनगवा तहसील के ग्राम पंचायत गढ़ में शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर अनियमितताओं और विक्रेता की मनमानी ने ग्रामीणों के लिए खाद्यान्न संकट खड़ा कर दिया है। पिछले दो माह से ग्रामीण हितग्राही खाद्यान्न के लिए भटकने को मजबूर हैं। विक्रेता की लापरवाही और अधिकारियों की चुप्पी ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
खाद्यान्न संकट से जूझते ग्रामीण
ग्राम गढ़ के निवासी विनायक सिंह ने बताया कि वह हर माह 40 किलो खाद्यान्न के हकदार हैं। यह खाद्यान्न गढ़ स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान से मिलना चाहिए। लेकिन दुकान के विक्रेता भमर लाल सिंह अपनी जिम्मेदारियों से अनुपस्थित रहते हैं। उनकी जगह दुकान का संचालन उनके पुत्र राहुल सिंह और गांव के ही कमलेश द्वारा किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ये अनधिकृत लोग अंगूठा लगवाकर खाद्यान्न का मनमाना वितरण कर रहे हैं। शिकायत करने पर हितग्राहियों को धमकाया जाता है और कहा जाता है, “जहां शिकायत करनी है, वहां कर दो।”
शिकायतों पर कार्रवाई का अभाव
ग्रामीणों ने 181 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और खाद्य विभाग के अधिकारियों को भी इस समस्या से अवगत कराया। बावजूद इसके, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में ग्रामीण मजबूर होकर पास के गांव लौरी और पारसी की दुकानों से खाद्यान्न लेने के लिए भटक रहे हैं।
नियमों की अनदेखी
सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, उचित मूल्य की दुकानों का संचालन केवल अधिकृत विक्रेता द्वारा किया जाना चाहिए। गढ़ ग्राम की दुकान में विक्रेता ने अपनी जिम्मेदारियां अनधिकृत लोगों को सौंप दी हैं, जिससे वितरण प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल
इस मामले में तहसील और जिला प्रशासन की चुप्पी ने उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह चुप्पी उनकी उदासीनता का प्रतीक है, या फिर अनियमितताओं में उनकी मिलीभगत का संकेत? हितग्राही यह जानने को उत्सुक हैं कि उनकी समस्याओं की अनदेखी क्यों की जा रही है।
हितग्राहियों की मांग
ग्रामीण हितग्राही प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि:
1. गढ़ ग्राम की उचित मूल्य दुकान में हो रही अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की जाए।
2. दोषी विक्रेता को तत्काल हटाकर जिम्मेदार व्यक्ति को दुकान संचालन की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
3. खाद्यान्न वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
सरकार की योजना पर प्रभाव
सरकार द्वारा कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए चलाई जा रही खाद्यान्न वितरण योजनाओं पर इस प्रकार की अनियमितताएं गंभीर असर डाल रही हैं। यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की साख को कमजोर कर सकता है।
ग्रामीणों की उम्मीद
ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। प्रशासन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा और सुनिश्चित करेगा कि उन्हें उनका हक बिना किसी भटकाव के मिले। यह मामला सरकार और प्रशासन के लिए न केवल एक चुनौती है, बल्कि उनकी जिम्मेदारी की
परीक्षा भी है।


