कमिश्नर रीवा की पहल पर अनशनकारियों का धरना पाचवें दिन हुआ स्थगित
संयुक्त आयुक्त रीवा दिव्या त्रिपाठी ने कमिश्नर प्रतिनिधि के रूप में धरना स्थल पर की पहल
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा, मध्यप्रदेश
रीवा जिला पंचायत कार्यालय परिसर में विगत पांच दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को आखिरकार कमिश्नर रीवा संभाग बी.एस. जामोद की पहल पर स्थगित कर दिया गया। यह धरना जिला पंचायत सदस्य लालमणि त्रिपाठी, आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी सहित अन्य समाजसेवियों और आम नागरिकों द्वारा जिला पंचायत कार्यालय परिसर में किया जा रहा था।
कमिश्नर रीवा संभाग द्वारा अपने प्रतिनिधि के तौर पर संयुक्त आयुक्त रीवा, दिव्या त्रिपाठी को धरना स्थल भेजा गया, जिन्होंने संभागायुक्त का संदेश अनशनकारियों तक पहुंचाया। इसके बाद धरनारत प्रतिनिधियों को कमिश्नर कार्यालय में बैठक के लिए आमंत्रित किया गया।
मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा
इस बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत की पूर्णकालिक पदस्थापना सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। कमिश्नर बी.एस. जामोद ने बताया कि सीईओ की पदस्थापना शासन स्तर से की जानी है, जिसका प्रस्ताव पहले ही भेजा जा चुका है। उन्होंने आश्वस्त किया कि 6 जनवरी 2025 के बाद कभी भी पदस्थापना पूरी कर दी जाएगी।
अन्य विषयों में जिला, जनपद, और ग्राम पंचायतों में अनियमितता, भ्रष्टाचार, मनरेगा, और वित्त आयोग की राशि के आवंटन व वितरण पर विस्तार से बातचीत हुई। कमिश्नर ने आश्वासन दिया कि इन सभी मुद्दों पर जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा आंदोलन
मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जिला पंचायत सदस्य जिला पंचायत कार्यालय परिसर में धरना देकर बैठे। इस आंदोलन ने शासन और प्रशासन का ध्यान पंचायतों में व्याप्त समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
धरना स्थगित करने में ये लोग रहे प्रमुख
धरना समाप्त करवाने में किसान नेता सुब्रत त्रिपाठी, गया प्रसाद मिश्र, जिला पंचायत सदस्य बृजेश कोरी, प्रमोद जैसवाल, आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी, और कमलेश तिवारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कमिश्नर कार्यालय में हुई बैठक और दिए गए आश्वासनों के बाद अनशनकारियों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। यह कदम प्रशासन और अनशनकारियों के बीच समन्वय और संवाद की सफलता का प्रतीक है।
भ्रष्टाचार और पारदर्शिता पर विशेष जोर
बैठक में भ्रष्टाचार और पंचायतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। कमिश्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित के मुद्दों पर शासन स्तर से ठोस कार्रवाई की जाएगी।
रीवा संभाग के इस घटनाक्रम ने न केवल स्थानीय प्रशासनिक तंत्र को झकझोरा है, बल्कि आम नागरिकों के विश्वास को भी पुनः स्थापित किया है।

