मौत की घाटी में फिर लहू बहा: सोहागी पहाड़ पर एक और ट्रक हादसा, सुरक्षा उपायों पर फिर उठे सवाल
रीवा, मध्य प्रदेश
रीवा जिले से इलाहाबाद को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर स्थित सोहागी पहाड़, जिसे 'मौत की घाटी' के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर दिल दहला देने वाले हादसे का गवाह बना। ढलान वाले इस खतरनाक क्षेत्र में यूपी नंबर UP-1788 के ट्रक के ब्रेक फेल होने के कारण यह हादसा हुआ। दुर्घटना में ट्रक चालक की दर्दनाक मौत हो गई।
कैसे हुआ हादसा
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि ट्रक तेज गति से घाटी के ढलान पर उतर रहा था। अचानक ब्रेक फेल होने से वाहन नियंत्रण से बाहर हो गया और डेथ प्वाइंट के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि इस क्षेत्र में दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं। सड़कों की खराब स्थिति और खतरनाक ढलान के कारण वाहन चालक हमेशा खतरे में रहते हैं।
सोहागी पहाड़: दुर्घटनाओं का इतिहास
सोहागी पहाड़ की खतरनाक ढलानों और लापरवाह रखरखाव के कारण यह क्षेत्र "मौत की घाटी" के नाम से कुख्यात है। हर साल यहां दर्जनों हादसे होते हैं। इन हादसों में कई लोगों की जान जा चुकी है, और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
पिछले वर्षों में आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने इस समस्या को उजागर किया था। उनके प्रयासों के बाद रीवा कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया था। लेकिन जांच रिपोर्ट फाइलों में दफन हो गई और दोषियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नए प्रस्ताव, लेकिन पुराने सवाल बरकरार
कुछ ही दिन पहले रीवा संभाग के कमिश्नर बाबू सिंह जामोद ने सोहागी घाटी की सुरक्षा व्यवस्था के लिए 18 करोड़ रुपये की लागत से मरम्मत और निर्माण कार्यों का प्रस्ताव रखा।
इस प्रस्ताव में घाटी के खतरनाक मोड़ों को चौड़ा करने, सड़कों की स्थिति सुधारने और सुरक्षा संकेतक लगाने जैसे कार्य शामिल हैं। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि जब पहले की परियोजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हुई और न ही दोषियों पर कार्रवाई हुई, तो क्या यह नई राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएगी?
बंसल पाथवेज: जिम्मेदारी या मुनाफाखोरी?
राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल वसूलने वाली बंसल पाथवेज कंपनी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
टोल वसूली: लाखों रुपये की टोल वसूली के बावजूद सड़कों का रखरखाव संतोषजनक नहीं है।
फौरन मरम्मत का दिखावा: हर हादसे के बाद कंपनी की जेसीबी मशीनें पहुंचती हैं और मरम्मत कार्य शुरू कर देती हैं। लेकिन यह केवल दिखावे तक सीमित रहता है।
दोषपूर्ण निर्माण: स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर खतरनाक मोड़ों और ढलानों के सुधार में कभी गंभीरता नहीं बरती गई।
समस्या का समाधान क्या है?
जानकारों का मानना है कि हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
1. सुरक्षा उपाय:
सड़क पर गति सीमा का सख्ती से पालन कराना।
ढलान वाले इलाकों में सुरक्षा संकेत और गति नियंत्रक उपकरण लगाना।
2. पारदर्शी जांच:
पिछले परियोजनाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई।
नई परियोजनाओं में भ्रष्टाचार रोकने के लिए स्वतंत्र एजेंसियों से निगरानी।
3. स्थायी समाधान:
सड़क की ढलानों को समतल बनाना।
दुर्घटनाओं की नियमित समीक्षा और जोखिम क्षेत्रों की पहचान।
स्थानीय निवासियों की चिंता
घाटी के आस-पास रहने वाले लोगों का कहना है कि हादसों की वजह से यह इलाका हर समय दहशत में रहता है। नए प्रस्ताव के तहत मिलने वाली 18 करोड़ रुपये की राशि को लेकर लोगों में गुस्सा और अविश्वास है। उनका मानना है कि यह धनराशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ सकती है।
"पहले के कार्यों की जांच और कार्रवाई के बिना नए प्रस्ताव का क्या मतलब है? हर बार हादसे के बाद फौरी मरम्मत होती है, लेकिन समस्या वहीं की वहीं रहती है," स्थानीय निवासी का कहना है।
सोहागी पहाड़ पर हादसे कब रुकेंगे, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है। लेकिन यदि पारदर्शिता और ईमानदारी से काम किया जाए, तो इस "मौत की घाटी" को सुरक्षित मार्ग में बदला जा सकता है।




