केवटी जलप्रपात मेला 2025: ऐतिहासिक धरोहर में उमड़ी श्रद्धा की गंगा, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा
रीवा (मध्य प्रदेश): भारत का 24वां सबसे ऊंचा झरना, केवटी जलप्रपात, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर यहां 14 जनवरी से 18 जनवरी तक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। इस ऐतिहासि
क मेले का आयोजन 1495 ईस्वी में राजा नागवन देव के समय से हो रहा है। यह मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का प्रतीक भी है।
हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का संगम
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस मेले में हर वर्ष तीन से चार हजार श्रद्धालु और पर्यटक सम्मिलित होते हैं। यहां पुरुष, महिलाएं, युवा और बच्चे मेले का भरपूर आनंद लेते हैं। मेले का मुख्य आकर्षण केवल जलप्रपात ही नहीं, बल्कि वहां स्थित प्राचीन मंदिर और ऐतिहासिक किला भी है, जो इस स्थल की ऐतिहासिक गरिमा को और बढ़ाता है।
स्थानीय कला और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन
मेले में आसपास के क्षेत्रों से आए हुए कारीगर और कलाकार अपनी विशिष्ट कलाकृतियों का प्रदर्शन और विक्रय करते हैं। इनमें लोहे का सामान, भेड़ी ऊन से बने कंबल, पत्थर की मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन, गन्ने लाई के उत्पाद, और अन्य घरेलू सामान प्रमुख होते हैं। इस मेले के माध्यम से स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को अपनी कला और हुनर को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मंच मिलता है, जिससे क्षेत्रीय हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलता है।
सुरक्षा व्यवस्था: प्रशासन ने कसी कमर
मेले में आने वाली विशाल भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। पूर्व वर्षों में घटित घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था और भी अधिक कड़ी की गई है। 9 जनवरी 2025 को पुलिस अनुविभागीय अधिकारी मनगवा (एसडीओपी) IPS ओम प्रकाश ने मेले स्थल का गहन निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में सरपंच, सचिव, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), सिरमौर जनपद पंचायत सीईओ और गंगेव, सिरमौर के अधिकारी भी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान यह निर्णय लिया गया कि मंदिर और जलप्रपात जाने वाले मुख्य मार्गों पर किसी भी प्रकार की दुकानें न लगाई जाएं, ताकि मार्ग अवरुद्ध न हो और चेन स्नैचिंग व जेबकतरी जैसी घटनाओं से बचा जा सके। दुकानों को किले के सामने नियत स्थान पर लगाने का निर्देश दिया गया है, जिससे श्रद्धालु निर्बाध रूप से मंदिर और जलप्रपात तक पहुंच सकें।
चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात
मेले की सुरक्षा में कोई कमी न रहे, इसके लिए गढ़ थाना प्रभारी अविनाश पांडे, लालगांव चौकी प्रभारी आर.बी. सिंह, सिरमौर थाना प्रभारी, बैकुंठपुर थाना प्रभारी सहित अतिरिक्त पुलिस बल और पुलिस लाइन रीवा से जवानों की तैनाती की गई है। सुरक्षा कर्मी पूरे मेले क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जा रही है।
एसडीओपी मनगवा ओम प्रकाश ने बताया कि मेले में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि न हो, इसके लिए पुलिस पूरी तरह से सतर्क है। अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा बलों को भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन स्थितियों और आपराधिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
वाहन चोरी और महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
मेले में वाहनों की चोरी, लूटपाट, महिलाओं से चेन स्नैचिंग और जेब कटने जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है। मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
दुकानदारों से अवैध वसूली पर सख्ती
मेले में दुकान लगाने वाले दुकानदारों ने पंचायत पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है। इस मामले में प्रशासन ने संज्ञान लिया है और अवैध वसूली पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दुकानदार से अतिरिक्त शुल्क वसूला जाना अनुचित है, और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों से मेले का माहौल और अधिक जीवंत और रंगीन हो जाता है। श्रद्धालु झरने की खूबसूरती का आनंद उठाने के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी शामिल होते हैं।
मेले की आस्था और सामाजिक समरसता का संगम
केवटी जलप्रपात का यह मेला आसपास के 15-20 किलोमीटर क्षेत्र के लोगों के लिए आस्था का केंद्र है। लोग इस मेले में आकर अपने इष्ट मित्रों से मिलते हैं और नववर्ष की शुरुआत करते हैं। यह मेला धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है, जो क्षेत्रीय पहचान को मजबूती प्रदान करता है।
प्रशासन की प्रतिबद्धता: शांतिपूर्ण और सुरक्षित मेला
प्रशासन और पुलिस की सतर्कता और मुस्तैदी के चलते यह भव्य मेला शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालु बिना किसी डर और परेशानी के इस ऐतिहासिक मेले का भरपूर आनंद उठा सकें।
एसडीओपी मनगवा ओम प्रकाश ने कहा, "यह मेला रीवा जिले की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया गया है। किसी भी अराजक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।"


