मऊगंज: बहुती केनाल परियोजना में अनियमित ब्लास्टिंग से ग्रामीणों में भय और आक्रोश, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
मऊगंज (देवतालाब):
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के देवतालाब विधानसभा क्षेत्र में बहुती केनाल परियोजना का निर्माण कार्य ग्रामीणों के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। बाणसागर परियोजना की इस अहम योजना में अनियमित और अत्यधिक मात्रा में विस्फोटकों का उपयोग किया जा रहा है। इस अनियमित ब्लास्टिंग के कारण आसपास के घरों, बोरवेल, हैंडपंप और अन्य संरचनाओं में दरारें आ गई हैं। इससे ग्रामीणों के मन में भय का माहौल है, और वे प्रशासन की निष्क्रियता से नाराज हैं।
क्या है विवाद?
बहुती केनाल परियोजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य में ब्लास्टिंग प्रक्रिया अपनाई जा रही है। लेकिन यह प्रक्रिया सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना की जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विस्फोटक का अत्यधिक उपयोग किया जा रहा है, जिससे न केवल संरचनात्मक क्षति हो रही है, बल्कि जान-माल को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। कई ग्रामीणों ने बताया कि उनके मकानों में बड़ी दरारें आ गई हैं, जबकि जलस्रोतों (बोरवेल और हैंडपंप) की कार्यक्षमता प्रभावित हुई है।
ग्रामीणों के डर और नुकसान की तस्वीर
मकानों को नुकसान: ब्लास्टिंग के कारण मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं, जिससे उनके गिरने का खतरा बढ़ गया है।
जलस्रोतों पर असर: बोरवेल और हैंडपंपों में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, जिससे पानी की आपूर्ति बाधित हो गई है।
सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त: विस्फोटों की आवाज से लोग दिन-रात भयभीत रहते हैं। बच्चों और बुजुर्गों की मानसिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ा है।
स्थानीय नेताओं ने उठाई आवाज
सीमा जयवीर सिंह सेंगर (प्रदेश उपाध्यक्ष, समाजवादी पार्टी):
"यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जनता की सुरक्षा की अनदेखी कर परियोजना को अंजाम दिया जा रहा है। प्रशासन चुप है और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। अगर यह लापरवाही जारी रही, तो इसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा। मैं मांग करती हूं कि दोषियों को तुरंत सजा दी जाए।"
इंजी. जयवीर सिंह सेंगर (पूर्व जिला पंचायत सदस्य, रीवा):
"मैंने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को इस गंभीर स्थिति से अवगत कराया है। इस प्रकार की ब्लास्टिंग नियमों के खिलाफ है। मैंने परियोजना के इंजीनियरों से संपर्क कर सुझाव दिया है कि केवल नियंत्रित ब्लास्टिंग की अनुमति दी जाए, ताकि ग्रामीणों को और नुकसान न हो। यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और सुधारात्मक कदम उठाए।"
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि जब से इस परियोजना की शुरुआत हुई है, तब से विस्फोटक के इस्तेमाल से समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। कई बार शिकायतें करने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर इस अनियमितता के कारण कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
ग्रामीणों की मांगें
ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को लेकर स्पष्ट मांगें रखी हैं:
1. ब्लास्टिंग प्रक्रिया में सुधार: अनियमित ब्लास्टिंग को तुरंत बंद कर केवल नियंत्रित और सुरक्षित ब्लास्टिंग की जाए।
2. मुआवजा: मकानों और जलस्रोतों को हुए नुकसान के लिए प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
3. दोषियों पर कार्रवाई: निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
4. स्थायी समाधान: परियोजना का कार्य पूर्ण होने तक एक निगरानी समिति बनाई जाए, जो सुरक्षा मानकों के पालन की जांच करे।
ग्रामीणों में आंदोलन की चेतावनी
अगर प्रशासन ने जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो ग्रामीणों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यह उनकी सुरक्षा और जीवन का सवाल है। "हमारे घर और संपत्ति को नुकसान हो रहा है। यदि प्रशासन ने हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो हम सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे," एक स्थानीय निवासी ने कहा।
बहुती केनाल परियोजना में अनियमित ब्लास्टिंग न केवल एक तकनीकी चूक है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी प्रतीक है। ग्रामीणों का आक्रोश उनकी सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी का परिणाम है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करे, दोषियों को दंडित करे और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाए। विकास के नाम पर जनता की जान-माल को खतरे में डालना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता।

