जान तो जान है... फिर चाहे वह दलित आशा साकेत की हो या अतिथि शिक्षिका रेशमा पांडेय की
मऊगंज पुलिस पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
मऊगंज जिले में हाल ही में घटी दो दुखद घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। एक ओर अतिथि शिक्षिका रेशमा पांडेय की आत्महत्या का मामला, जिसमें पुलिस ने तेज़ी से कार्रवाई कर साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट के कारण आत्महत्या की वजह का खुलासा कर दिया। पुलिस की इस कार्यशैली की सराहना भी हो रही है।
लेकिन दूसरी ओर, दलित महिला और राजनीति में सक्रिय आशा साकेत की आत्महत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। 7 जनवरी को आशा साकेत ने आत्महत्या कर ली, परंतु इस मामले की गंभीरता और जांच की दिशा को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी असंतोष की भावना है।
कौन थीं आशा साकेत?
आशा साकेत राजनीति में सक्रिय थीं और वे हर चुनावी गतिविधि—चाहे वह विधानसभा हो, लोकसभा हो या पार्टी संगठन—में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती थीं। एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ-साथ वे दलित समाज की आवाज़ उठाने में भी अग्रणी थीं।
परिवार के सवाल और संदेह
आशा साकेत के पति ने आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी के मोबाइल से महत्वपूर्ण फोटो, वीडियो और ऑटोमेटिक कॉल रिकॉर्डिंग डिलीट कर दी गई है। सवाल उठता है कि आखिरकार मोबाइल से डेटा क्यों और किसने हटाया? क्या इन डेटा में कोई ऐसा सबूत था जो उनकी आत्महत्या की असली वजह उजागर कर सकता था?
जातिगत भेदभाव का आरोप
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या आशा साकेत की आत्महत्या की जांच में जातिगत भेदभाव हो रहा है? पहले भी मुद्रिका कोल की हत्या के मामले में न्याय मिलने में 23 महीने लग गए थे। क्या दलित होने के कारण ही आशा साकेत के मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?
निष्पक्ष जांच की मांग
आशा साकेत के परिजनों ने अगस्त क्रांति मंच के संयोजक कुंज बिहारी तिवारी से मुलाकात कर अपनी पीड़ा साझा की। इसके बाद कुंज बिहारी तिवारी ने मऊगंज की पुलिस अधीक्षक श्रीमती रसना ठाकुर को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।
समाज में बढ़ रही चिंता
समाज में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि क्या न्याय भी जाति देखकर दिया जाता है? क्या कानून सबके लिए बराबर नहीं है? अगर रेशमा पांडेय के मामले में पुलिस त्वरित कार्रवाई कर सकती है, तो आशा साकेत के मामले में देरी क्यों?
अब क्या होगा आगे?
अब देखने वाली बात यह होगी कि मऊगंज पुलिस इस संवेदनशील मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता से कार्रवाई करती है। समाज यह उम्मीद कर रहा है कि आशा साकेत की आत्महत्या की सच्चाई सामने आए और दोषियों को सख्त सजा दी जाए।
क्योंकि जान तो जान है... फिर चाहे वह किसी की भी हो।

