सूबेदार शैलेन्द्र कुमार गुप्ता: समाज सेवा की मिसाल, शासकीय विद्यालय के खेल मैदान के लिए भूमि दान
विंध्य वसुंधरा समाचार शैलेन्द्र मिश्रा
गढ़ रीवा, मध्यप्रदेश:
सूबेदार शैलेन्द्र कुमार गुप्ता, भारतीय सेना में सेवारत, ने अपनी मातृभूमि और समाज के प्रति अपने कर्तव्य को न केवल समझा, बल्कि उसे निभाने का एक अनुकरणीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया। उन्होंने ग्राम गढ़ स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान तक पहुंच मार्ग के लिए अपनी निजी भूमि का एक हिस्सा स्वेच्छा से दान कर दिया। उनका यह कदम क्षेत्र के बच्चों और समाज के विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
समस्या: खेल मैदान के उपयोग में बाधा
राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के समीप स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गढ़, में एक विशाल खेल मैदान है। लेकिन उस तक पहुंचने के लिए कोई उपयुक्त मार्ग न होने के कारण बच्चे खेलकूद जैसी गतिविधियों में हिस्सा लेने से वंचित हो रहे थे। यह समस्या विद्यालय के विकास और बच्चों के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही थी।
समाधान: भूमि का स्वैच्छिक दान
सूबेदार गुप्ता ने इस समस्या को समझते हुए अपनी निजी भूमि, आराजी नंबर 843/2, का एक हिस्सा शासकीय विद्यालय को समर्पित कर दिया। उन्होंने 9×75 = 675 वर्ग फीट भूमि दान की, जो उनके मकान के उत्तर दिशा में स्थित है। यह भूमि अब खेल मैदान तक पहुंच मार्ग के रूप में उपयोग की जाएगी।
दान की गई भूमि का विवरण:
कुल भूमि: 117×75 फीट
दान की गई भूमि: 9×75 = 675 वर्ग फीट
स्थान: उनके मकान के बगल में उत्तर दिशा में स्थित।
शेष भूमि: उनके मकान और बाउंड्री वॉल के लिए उपयोग की गई।
पारिवारिक भूमि का विवरण:
सूबेदार गुप्ता के पिता, स्व. लालमणि गुप्ता, ने अपने जीवनकाल में अपनी भूमि का बंटवारा विधिवत तरीके से किया था। तीनों भाइयों को 26-26 फीट मकान दिए गए, जबकि शैलेन्द्र गुप्ता को मकान न देकर 26 फीट अतिरिक्त भूमि दी गई। 52 फीट भूमि माता-पिता ने अपने लिए निकाली थी, जिसमें से 13 फीट भूमि शैलेन्द्र गुप्ता को मिली।
स्वेच्छा और समाजहित में योगदान
सूबेदार गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय उन्होंने किसी दबाव या भय के बिना, पूरी तरह से स्वेच्छा से लिया। उन्होंने कहा, "बच्चों के खेल और शिक्षा के लिए मेरी यह छोटी सी पहल, उनके उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगी। समाज को कुछ लौटाना मेरा कर्तव्य है।"
सूबेदार गुप्ता के इस कदम की चारों ओर सराहना हो रही है:
विद्यालय प्रबंधन: "यह कदम बच्चों के भविष्य को संवारने में मील का पत्थर साबित होगा। अब खेलकूद और अन्य गतिविधियां सहज रूप से संचालित की जा सकेंगी।"
गांव के बुजुर्ग: "यह उदाहरण हमें बताता है कि सच्चा विकास तब होता है जब व्यक्ति अपने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर समाज की भलाई के लिए काम करता है।"
युवा वर्ग: "सूबेदार गुप्ता ने हमें दिखाया कि समाज के प्रति योगदान कैसे किया जा सकता है।"
सामुदायिक विकास की नई दिशा
सूबेदार शैलेन्द्र कुमार गुप्ता का यह कदम दिखाता है कि जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों और मूल्यों को समझता है, तो बड़े बदलाव संभव हैं। उनका यह कार्य न केवल बच्चों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

