ई-रिक्शा कचरा वाहन का हो रहा दुरुपयोग, ग्रामीण क्षेत्रों में गंदगी का अंबार
गंगेव, रीवा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सरकार द्वारा पंचायतों को ई-रिक्शा कचरा वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन ग्राम पंचायत गढ़, जनपद पंचायत गंगेव, जिला रीवा में इन वाहनों का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसका नतीजा यह है कि सार्वजनिक स्थलों पर गंदगी का अंबार लगा हुआ है और पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
सार्वजनिक स्थलों पर लगे कचरे के ढेर
ग्राम पंचायत गढ़ में प्राथमिक विद्यालय बालक, हायर सेकेंडरी स्कूल, बस स्टैंड, पुरानी राष्ट्रीय राजमार्ग-27 के किनारे सहित अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर लगे हुए हैं। यह न केवल स्वच्छता मिशन के उद्देश्यों को विफल कर रहा है, बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी खतरा बनता जा रहा है। खुले में पड़े कचरे से दुर्गंध, मच्छरों और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है।
कचरा वाहन का हो रहा दुरुपयोग
सरकार द्वारा ग्राम पंचायत गढ़ को ई-रिक्शा कचरा वाहन सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उपलब्ध कराए गए थे। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि इन वाहनों का सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। कई बार ये वाहन निजी कार्यों में इस्तेमाल होते देखे गए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों से कचरा उठाने में लापरवाही बरती जा रही है। यह मामला अब जनचर्चा का विषय बन गया है।
पंचायत प्रशासन बना अनजान, नहीं हो रही कार्यवाही
स्थानीय नागरिकों द्वारा पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। ग्राम पंचायत गढ़ गंगेव जनपद की सबसे बड़ी पंचायतों में से एक है, इसके बावजूद यहां की सफाई व्यवस्था बदहाल है। प्रशासन की अनदेखी और कचरा वाहन के दुरुपयोग से स्वच्छ भारत अभियान की योजनाएं ध्वस्त होती दिख रही हैं।
स्थानीय लोगों की मांग, जल्द हो समाधान
ग्रामवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे जनसुनवाई, जिला कलेक्टर, जनप्रतिनिधियों और मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे को उठाने के लिए मजबूर होंगे। लोगों ने मांग की है कि
1. ई-रिक्शा कचरा वाहनों के सही उपयोग की निगरानी की जाए।
2. प्रत्येक क्षेत्र से नियमित रूप से कचरा उठाने की व्यवस्था लागू की जाए।
3. लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई हो।
4. पंचायत में स्वच्छता व्यवस्था सुधारने के लिए जनभागीदारी बढ़ाई जाए।
प्रशासन कब उठाएगा ठोस कदम?
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और पंचायत प्रशासन इस समस्या का समाधान करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं। जब सरकार स्वच्छता मिशन के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो इन योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा? क्या पंचायत प्रशासन पर कोई जवाबदेही तय की जाएगी? यह सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


