सहकार भारती मध्य प्रदेश का दो दिवसीय सम्मेलन इंदौर में संपन्न
संगठनात्मक मुद्दों के साथ सहकारी समितियों में चुनाव न होने पर जताई चिंता
इंदौर। सहकार भारती मध्य प्रदेश का दो दिवसीय राज्यस्तरीय सम्मेलन इंदौर के हेड गवार संघ कार्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस महत्वपूर्ण आयोजन में प्रदेश के सभी संभागों के संभाग प्रमुख, जिलों के जिला अध्यक्ष, जिला महामंत्री, संगठन प्रमुख, महिला संगठन प्रमुख सहित प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भाग लिया। सम्मेलन में सहकारी आंदोलन को और अधिक प्रभावी बनाने, संगठनात्मक विस्तार, तथा सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली को मजबूती देने जैसे विभिन्न विषयों पर गहन मंथन किया गया।
सहकारी समितियों में चुनाव न होने पर जताई नाराजगी
सम्मेलन में प्रमुख रूप से सहकारी समितियों में समय सीमा के भीतर चुनाव न कराए जाने के मुद्दे पर भी चर्चा की गई। सहकार भारती के पदाधिकारियों ने सरकार की इस उदासीनता पर चिंता जताई और कहा कि न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद सहकारी समितियों में चुनाव संपन्न नहीं कराए जा रहे हैं। इस विषय पर संगठन ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसे संबंधित सरकार और विभाग को भेजा जाएगा। इस प्रस्ताव में यह मांग की गई है कि चुनाव समय सीमा के भीतर कराए जाएं, अन्यथा संगठन को अगली कार्रवाई करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।
सहकारी आंदोलन को सशक्त बनाने पर जोर
सहकार भारती का यह सम्मेलन सहकारी आंदोलन को अधिक प्रभावशाली और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में इस बात पर बल दिया गया कि सहकारी समितियां समाज के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए उनकी कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
सहकार भारती: सहकारी क्षेत्र का एक मजबूत संगठन
गौरतलब है कि सहकार भारती की स्थापना 11 जनवरी 1978 को पुणे, महाराष्ट्र में माधवराव गोडबोले द्वारा की गई थी। यह संगठन सहकारी आंदोलन को जनकल्याणकारी स्वरूप प्रदान करने और इसे सशक्त बनाने के लिए कार्यरत है। हाल ही में 25-26 मई 2024 को रीवा में सहकार भारती मध्य प्रदेश का अधिवेशन संपन्न हुआ था, जिसमें मध्य प्रदेश शासन के उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ला, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री दीना नाथ ठाकुर, राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री संजय पाचपोर सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया था।
आगे की रणनीति
सहकार भारती ने सहकारी समितियों में पारदर्शिता लाने और समय पर चुनाव कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाने की योजना बनाई है। यदि सरकार इस पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो संगठन व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।इस सम्मेलन के माध्यम से सहकार भारती ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सहकारी आंदोलन को सशक्त करने और इसे भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। सम्मेलन में पारित प्रस्ताव से उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार सहकारी समितियों में चुनाव करवाने को लेकर शीघ्र निर्णय लेगी, जिससे सहकारी व्यवस्थाओं में सुचारू संचालन सुनिश्चित हो सके।



