एमपी बोर्ड में साल में दो बार होंगी 10वीं-12वीं की परीक्षाएं, सीबीएसई मॉडल पर होगा काम
भोपाल। मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि अब राज्य में 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। यह नई व्यवस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के मॉडल पर आधारित होगी। इस फैसले का उद्देश्य छात्रों को अधिक अवसर देना और परीक्षा प्रणाली को अधिक लचीला बनाना है।
क्या है नई परीक्षा प्रणाली?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अब छात्रों को साल में दो बार परीक्षा देने का मौका मिलेगा—एक बार मुख्य परीक्षा और दूसरी बार सुधार परीक्षा। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता है, तो वह दूसरी परीक्षा में शामिल होकर अपने अंक सुधार सकता है।
सीबीएसई मॉडल पर होगा काम
इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए एमपी बोर्ड अब सीबीएसई की तर्ज पर परीक्षा पैटर्न, मूल्यांकन प्रक्रिया और पाठ्यक्रम में भी कुछ बदलाव करेगा।
छात्रों को मिलेगा लाभ
छात्रों पर परीक्षा का तनाव कम होगा।
जिन छात्रों की पहली परीक्षा खराब जाती है, उन्हें दूसरा मौका मिलेगा।
उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए बेहतर अंक प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
साल में दो बार परीक्षा होने से पुनर्मूल्यांकन की जरूरत कम होगी।
कब से लागू होगी यह प्रणाली?
इस नई परीक्षा प्रणाली को 2025 सत्र से लागू करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए एमपी बोर्ड जल्द ही विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा।
अभिभावकों और शिक्षकों की प्रतिक्रिया
अभिभावकों और शिक्षकों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे छात्रों को मानसिक तनाव से राहत मिलेगी और वे बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे।
इस बदलाव से एमपी बोर्ड के लाखों छात्रों को फायदा होगा और राज्य की शिक्षा प्रणाली अधिक उन्नत और लचीली बनेगी।




