ट्रैफिक पुलिस की बड़ी लापरवाही: कार चालक का हेलमेट न पहनने पर काटा ₹1000 का चालान, पीड़ित ने किया अनोखा विरोध
बिजनौर। शहर में ट्रैफिक पुलिस की एक चौंकाने वाली लापरवाही का मामला सामने आया है, जहां एक कार चालक का हेलमेट न पहनने पर ₹1000 का चालान काट दिया गया। इस अजीबोगरीब घटना ने आम जनता को हैरान कर दिया है और ट्रैफिक पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हेलमेट चालान से नाराज कार चालक ने किया अनोखा विरोध
चालान कटने के बाद नाराज कार चालक ने अनोखे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। अब वह कार में हेलमेट पहनकर घूम रहा है ताकि लोगों का ध्यान इस पुलिसिया लापरवाही की ओर आकर्षित किया जा सके। पीड़ित कार चालक का कहना है कि उसकी कार अस्पताल परिसर में खड़ी थी और बाहर सड़क पर नहीं आई थी, फिर भी ट्रैफिक पुलिस ने उसके नाम पर चालान काट दिया। जब उसे चालान की जानकारी मिली तो वह आश्चर्यचकित रह गया। उसने अधिकारियों से इस मुद्दे पर बात करनी चाही, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
"कार अस्पताल से बाहर नहीं निकली थी, फिर चालान क्यों?"
चालक का कहना है, "मेरी कार अस्पताल में पार्क थी और मैंने हेलमेट नहीं पहना था, क्योंकि मैं कार चला रहा था, बाइक नहीं! लेकिन फिर भी ट्रैफिक पुलिस ने बिना किसी तर्क के मेरे नाम पर चालान जारी कर दिया। आखिर यह कैसी लापरवाही है?"
कोर्ट में लड़ेंगे न्याय की लड़ाई
अन्यायपूर्ण चालान से परेशान कार चालक ने अब कानूनी कार्रवाई करने का फैसला किया है। उसने बताया कि वह इस मामले को कोर्ट में ले जाएगा और न्याय के लिए लड़ाई लड़ेगा। अगर इस तरह के गलत चालान काटे जाते रहेंगे, तो आम जनता के साथ अन्याय होगा। नियमों को सही से लागू किया जाना चाहिए, न कि मनमाने तरीके से। मैं इस अन्याय के खिलाफ कोर्ट में अपील करूंगा और दोषी अधिकारियों से जवाब मांगूंगा।"
स्थानीय लोगों में नाराजगी, पुलिस से जवाब मांगने की उठी मांग
यह मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने ट्रैफिक पुलिस की इस लापरवाही पर सवाल उठाए हैं और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। एक स्थानीय नागरिक ने कहा, "अगर कार में हेलमेट पहनना जरूरी होता, तो क्या अब हर कार चालक को हेलमेट पहनना पड़ेगा? यह तो ट्रैफिक पुलिस की सरासर लापरवाही और आम जनता को परेशान करने वाला कदम है। प्रशासन को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।"
प्रशासन और पुलिस की चुप्पी, क्या मिलेगा न्याय?
इस मामले पर अभी तक प्रशासन और पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रैफिक पुलिस इस गलती को स्वीकार करती है या नहीं और क्या पीड़ित चालक को न्याय मिल पाता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रशासनिक गलतियों की मार आम जनता पर ही पड़ती है। अब देखना होगा कि न्याय की इस लड़ाई में कार चालक की जीत होती है या नहीं।

