रबी विपणन वर्ष 2025-26
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ उपार्जन हेतु महत्वपूर्ण निर्देश
1. उपार्जन की गुणवत्ता एवं मानक
किसानों से एफ.ए.क्यू. (FAQ) गुणवत्ता की उपज ही न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी।
भारत सरकार द्वारा निर्धारित यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशंस के अनुसार उपार्जन किया जाएगा।
प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर गुणवत्ता मानकों के नमूने प्रदर्शित किए जाएंगे।
2. उपार्जन अवधि एवं समय
उपार्जन अवधि: शासन द्वारा निर्धारित अवधि अनुसार होगी।
खरीदी के दिन: सोमवार से शुक्रवार, समय सुबह 8:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
शनिवार एवं रविवार: खाद्यान्न का परिवहन, भंडारण, लेखा मिलान और अपग्रेडेशन कार्य किए जाएंगे।
3. गेहूँ के भंडारण एवं सुरक्षा
उपार्जन एजेंसी द्वारा उपार्जित गेहूँ की सुरक्षा एवं गुणवत्ता बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी।
भंडारण स्थल तक गेहूँ के परिवहन की सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
गोदाम स्तर पर गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा और एमपीएससीएससी द्वारा स्वीकृति पत्रक जारी होंगे।
4. उपज की तौल एवं पंजीयन
किसान को पंजीयन में दर्ज फसल रकबा एवं तहसीलदार द्वारा निर्धारित उत्पादकता के अनुसार अधिकतम विक्रय योग्य मात्रा तय करनी होगी।
उपज बेचने के लिए किसान को wb.mpeuparjan.nic.in पर स्लॉट बुकिंग करनी होगी।
तौल की प्रक्रिया:
गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही गेहूँ की तौल होगी।
गेहूँ 50 किलो + वारदाना वजन के अनुसार ही तौला जाएगा।
नवीन जूट के बोरे में 580 ग्राम स्टैण्डर्ड वजन के साथ भराई होगी।
5. उपार्जन केंद्रों पर मानकीकरण
हर बोरे पर 18x18 इंच की लाल स्टेंसिल (छापा) लगाना अनिवार्य।
बोरे पर उपार्जन वर्ष, केंद्र का नाम (कोड सहित), और कृषक पंजीयन क्रमांक लिखना आवश्यक है
बोरे की सिलाई:
विद्युत चलित मशीन से लाल धागे की डबल सिलाई की जाएगी।
सिलाई के बाद कृषकवार पृथक-पृथक थप्पी लगाई जाएगी ताकि परिवहन में सुविधा हो।
6. भुगतान प्रक्रिया
किसान की उपज तौलने के बाद स्लॉट बुकिंग नंबर और अनुमानित मात्रा के आधार पर तौल पर्ची जारी की जाएगी।
गुणवत्ता परीक्षण एवं तौल के बाद देयक जारी होगा।
ई-उपार्जन पोर्टल पर खरीदी प्रविष्टि के लिए आधार ई-केवाईसी (OTP/बायोमेट्रिक) सत्यापन अनिवार्य।
किसान को कंप्यूटराइज्ड प्रिंटेड रसीद (डबल कॉपी) दी जाएगी।
देयक जारी होने के बाद उसमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकेगा।
7. अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
नापतौल निरीक्षण:
सभी उपार्जन एवं भंडारण केंद्रों के नापतौल उपकरणों का सत्यापन होगा।
धर्मकांटे का कैलिब्रेशन करके सीपीयू सील किया जाएगा।
परिवहन:
पहले तौला गया स्कंध पहले भेजने की नीति (FIFO) अपनाई जाएगी।
एक से अधिक किसानों की उपज को मिश्रित कर लूज में भंडारित नहीं किया जाएगा।
किसान की उपज की तौल गोदाम परिसर में की जाएगी, गोदाम के भीतर (शटर के अंदर)
इस दिशा-निर्देश का उद्देश्य किसानों को गेहूँ उपार्जन प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करना है। प्रत्येक किसान को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे गुणवत्ता मानकों का पालन करें और स्लॉट बुकिंग के माध्यम से उपज विक्रय करें। उपार्जन केंद्रों पर मानक प्रक्रियाओं का पालन करके गेहूँ की गुणवत्ता और भंडारण की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
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