अवैध चिकित्सकों का बढ़ता साम्राज्य: इलाज के नाम पर खिलवाड़
विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा/मऊगंज मध्यप्रदेश 4 मार्च 2025
चिकित्सा को हमेशा से एक पुण्य कार्य माना गया है, लेकिन वर्तमान समय में यह सेवा नहीं, बल्कि एक अवैध व्यापार बन चुका है। शहरों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक अवैध चिकित्सा का धंधा तेजी से फल-फूल रहा है। बिना किसी मेडिकल डिग्री या प्रमाणपत्र के, झोलाछाप डॉक्टर गंभीर बीमारियों का इलाज कर रहे हैं। कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां गलत इलाज या दवाइयों के ओवरडोज के कारण मरीजों की मौत हो चुकी है। बावजूद इसके, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन अवैध चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहा है।
अवैध चिकित्सकों की बढ़ती संख्या
रीवा और मऊगंज जिलों के समस्त ब्लॉकों में अवैध चिकित्सकों की भरमार हो चुकी है। शहरों में खुलेआम इनके बोर्ड लगे हुए हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में ये घरों में ही दुकान सजाकर इलाज कर रहे हैं। कुछ चिकित्सक मोटरसाइकिल पर घूम-घूमकर लोगों को दवाइयां दे रहे हैं। इन झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या अब सैकड़ों में नहीं, बल्कि हजारों में पहुंच चुकी है। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और अन्य राज्यों से आए लोग भी रीवा-मऊगंज के कस्बों और गांवों में अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं दे रहे हैं।
गंभीर बीमारियों का फर्जी इलाज
इन अवैध चिकित्सकों की हिम्मत इतनी बढ़ गई है कि अब ये सिर्फ सामान्य बीमारियों का ही नहीं, बल्कि कैंसर, टीबी, हृदय रोग, किडनी रोग और प्रसव तक का इलाज करने का दावा कर रहे हैं। शहरों में तो इनका पूरा नेटवर्क बन चुका है, जहां मरीजों को महंगे इंजेक्शन और ड्रिप (बोतल) चढ़ाकर लूटा जाता है।
1. इंजेक्शन और बोतल के नाम पर लूट
झोलाछाप डॉक्टरों का मुख्य हथियार इंजेक्शन और ड्रिप (बोतल) बन चुके हैं। बिना किसी जांच के ये हर मरीज को इंजेक्शन और ग्लूकोज चढ़ा देते हैं, जिससे मरीज को तात्कालिक रूप से राहत तो मिलती है, लेकिन यह आगे चलकर बड़ी समस्याओं को जन्म देता है। बोटल का ₹500 इंजेक्शन का ₹200 हर मरीज से इतना अनिवार्य है यदि एक से अधिक बाटल चढ़े तो वह संख्या निरंतर उतने ही गुना बढ़ जाती है चार बोटल का 2000 हो जाता है।
2. मरीजों की जान से खिलवाड़
गलत दवाइयों और इंजेक्शन के कारण कई मरीजों की जान जा चुकी है। कुछ मामलों में दवाइयों के ओवरडोज या गलत मिश्रण के कारण मरीजों को गंभीर रिएक्शन हुआ, लेकिन ऐसे झोलाछाप डॉक्टर इलाज जारी रखते हैं, जब तक कि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो जाए। कई बार मरीज की हालत बिगड़ने पर उसे बड़े अस्पताल रेफर कर दिया जाता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
3. प्रसव और सर्जरी तक करने लगे झोलाछाप डॉक्टर
कुछ अवैध चिकित्सक इतने साहसी हो गए हैं कि वे बिना किसी योग्यता के डिलीवरी और सर्जरी तक करने लगे हैं। इनका कोई लाइसेंस नहीं होता, न ही इनके पास आवश्यक उपकरण होते हैं। ग्रामीण इलाकों में कई महिलाओं की जान प्रसव के दौरान चली गई, लेकिन कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई।
स्वास्थ्य योजनाओं की विफलता
सरकार द्वारा गरीबों के लिए कई स्वास्थ्य योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और खराब व्यवस्थाओं के कारण ग्रामीण जनता मजबूरी में इन अवैध चिकित्सकों के पास जाने को विवश हो जाती है।
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी – ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। जो डॉक्टर तैनात हैं, वे अधिकतर अपनी ड्यूटी से नदारद रहते हैं।
स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव – अस्पतालों में आवश्यक दवाइयों, उपकरणों और मशीनों की भारी कमी है। ऐसे में मरीजों को प्राइवेट क्लीनिकों की तरफ धकेल दिया जाता है।
प्राइवेट अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों की सांठगांठ – कुछ सरकारी डॉक्टर भी इन अवैध चिकित्सकों के साथ मिले होते हैं। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में उचित इलाज नहीं मिलने पर उन्हें निजी अस्पतालों या झोलाछाप डॉक्टरों के पास भेज दिया जाता है।
प्रशासन की निष्क्रियता और भ्रष्टाचार
कई वर्षों पूर्व जिला प्रशासन ने एक विशेष अभियान चलाया था, जिसमें 420 अवैध चिकित्सकों की पहचान की गई थी। उस समय कुछ क्लीनिकों को बंद भी किया गया, लेकिन यह अभियान लंबे समय तक नहीं चला। आज हालात पहले से भी ज्यादा खराब हो चुके हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन ने इन्हें खुली छूट दे रखी है? क्या इन झोलाछाप डॉक्टरों को पुलिस और स्वास्थ्य विभाग से संरक्षण मिल रहा है? क्या गरीबों की जान से खेलना अब एक व्यवसाय बन चुका है?
अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करेगा, बल्कि हजारों निर्दोष लोगों की जान भी ले लेगा। चिकित्सा सेवा को व्यवसाय बनने से रोकना होगा और इसे फिर से एक मानवीय सेवा के रूप में स्थापित करना होगा। प्रशासन और सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि अवैध चिकित्सकों का यह साम्राज्य खत्म किया जा सके और लोगों को सुरक्षित और सस्ती चिकित्सा सुविधा मिल सके।

