रीवा संभाग में नशे और अवैध गतिविधियों पर पुलिस की चुनौती
रीवा संभाग में नए पुलिस अधिकारियों के आगमन के बाद कानून व्यवस्था को सुधारने की कवायद तेज हो गई है। क्षेत्र में नशे के अवैध कारोबार, चोरी, अवैध वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों की रोकथाम एक बड़ी चुनौती बन गई है। वर्तमान पुलिस आईजी और डीआईजी की ईमानदार कार्यशैली के बावजूद, क्या यह सुधार रंग लाएगा?
नशे का बढ़ता कारोबार
रीवा संभाग में नशीली कफ सिरप, गांजा, शराब और ब्राउन शुगर की बिक्री लगातार बढ़ रही है। कोरकसम माफिया के तार कई सीमावर्ती थानों से जुड़े हुए हैं, जिससे पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पकड़े गए अपराधियों के बयानों से यह स्पष्ट हुआ है कि कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत के कारण यह अवैध व्यापार फल-फूल रहा है।
अवैध शराब और पुलिसकर्मियों की संलिप्तता
शराब की अधिकृत दुकानों के रजिस्टरों की गोपनीय जांच करने पर सामने आया कि सर्वाधिक शराब की खरीद फरोख्त पुलिसकर्मियों द्वारा ही की जा रही है। यदि रजिस्टरों का मिलान किया जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि सरकारी सेवकों द्वारा शराब पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह एक गंभीर मामला है, जिस पर प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर अवैध गतिविधियां
राष्ट्रीय राजमार्ग 30 और 35 पर स्थित कुछ स्थानों पर अवैध गतिविधियों की खबरें लगातार मिल रही हैं। कुछ संगठित अपराधी इन मार्गों का उपयोग अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए कर रहे हैं। ब्राउन शुगर, गांजा और कफ सिरप के तस्कर पुलिस चेकिंग से बचने के लिए अलग-अलग मार्गों का उपयोग करते हैं। इनके लिए पेट्रोलिंग गाड़ियों का उपयोग किया जाता है, जो रास्ते में पुलिस चेकिंग की जानकारी तस्करों को देती हैं।
अपराध पर रोकथाम की चुनौतियां
रीवा जिले के कई पुलिस थानों में भ्रष्टाचार की शिकायतें आम हो गई हैं। यदि नशेड़ियों से गुप्त रूप से पूछताछ की जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि किसके संरक्षण में यह नशे का कारोबार चल रहा है। रीवा-मऊगंज जिले के पुलिस अधिकारियों की ईमानदारी और निष्ठा सराहनीय है, लेकिन जब तक पूरे पुलिस तंत्र में सुधार नहीं होगा, तब तक अपराधों की रोकथाम मुश्किल होगी।
क्या पुलिस कर पाएगी निष्पक्ष जांच?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पुलिस अधिकारी प्रयासरत हैं, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वे इस व्यवस्था को सुधारने में सफल होंगे? जब पुलिस विभाग में ही कुछ लोग अपराधियों की मदद कर रहे हैं, तो अपराधों पर लगाम लगाना आसान नहीं होगा।
पुलिस प्रशासन के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है। यदि आईजी और डीआईजी स्तर पर सीआईडी जांच कराई जाती है, तो कई चौकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। जनता को भी सहयोग करना होगा और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देनी होगी। आने वाला समय ही बताएगा कि क्या रीवा संभाग में अपराध पर लगाम लगाई जा सकेगी या नहीं।
कुछ थानों की पुलिस कर्मचारी 50% रात में दारू के नशे में रहते है। राष्टीय राज्य मार्ग 30 और 35 पर पुलिस द्वारा भूसा बकरी भैंस अवैध परिवहन की वसूली में व्यस्त रहते है। यही नहीं हद तो तब हो गई जब पुलिस के कुछ छोटे कर्मचारियों के साथ गांव के निजी लोगों द्वारा फोर वीलर वाहन से रात भर चेकिंग की जाती है। हर थानों में कुछ पुलिस के लोगो का अपराधियों से निकटता है। जिससे ईमानदार पुलिस कर्मी भी शक के दायरे में आते है। ऐसे लोगों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।




