रीवा जिले के गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत लौरी खुर्द में बाउंड्री निर्माण में भारी भ्रष्टाचार, जनता में आक्रोश
रीवा, गंगेव: गंगेव जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत लौरी खुर्द की प्राथमिक पाठशाला में बाउंड्री और चबूतरे के निर्माण में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। ग्रामीणों ने पंचायत के तत्कालीन सचिव शिवेंद्र तिवारी पर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप लगाया है, जिन्होंने पाँच वर्ष पूर्व इस निर्माण कार्य के लिए धन आहरित किया था।
बाउंड्री निर्माण में अनियमितताएँ, घटिया सामग्री का उपयोग
ग्रामवासियों का आरोप है कि प्राथमिक विद्यालय लौरी खुर्द में बाउंड्री निर्माण के लिए स्वीकृत राशि का दुरुपयोग कर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे दीवारें कमजोर पड़ गईं और कई स्थानों पर दरारें आ गई हैं।
इसके अलावा, विद्यालय परिसर में बनाए गए चबूतरे की दीवार भी फट गई। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद ही इनकी हालत जर्जर हो गई, जिससे भ्रष्टाचार की पुष्टि होती है।
पंचायतों की दुर्दशा, जनता को भारी कठिनाइयाँ
सूत्रों के अनुसार, सचिव शिवेंद्र तिवारी जहां भी कार्यरत रहे, वहां वित्तीय अनियमितताओं ने विकास कार्यों को बाधित किया। आरोप है कि उन्होंने सरकारी धन का गलत तरीके से आहरण कर लाखों रुपये की हेराफेरी की।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई नागरिक उनसे इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास करता है, तो वे फोन कॉल नहीं उठाते और पंचायत कार्यालय में भी गुपचुप तरीके से आते-जाते हैं। इससे जनता को प्रशासन से जुड़ी समस्याओं के समाधान में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
राजनीतिक संरक्षण के चलते नहीं होती कार्रवाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सत्ता पक्ष के नेताओं के संरक्षण के कारण सचिव पर कोई कठोर कार्रवाई नहीं की जाती।
सूत्रों के मुताबिक, पंचायत में होने वाली किसी भी जाँच को कथित रूप से 'सेवा शुल्क' देकर रुकवा दिया जाता है। यही कारण है कि भ्रष्टाचार के बावजूद उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
जनता ने की निष्पक्ष जाँच और कठोर कार्रवाई की माँग
ग्राम पंचायत लौरी खुर्द के नागरिकों ने प्रशासन से इस भ्रष्टाचार की जाँच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की माँग की है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष जाँच नहीं हुई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि जब तक ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ग्राम पंचायतों में विकास कार्य संभव नहीं हो पाएंगे।



