रीवा: गेहूं उपार्जन केंद्रों में पारदर्शिता के दावे, पर हकीकत कुछ और!
रीवा। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने जिले के सभी गेहूं उपार्जन केंद्रों में समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गेहूं के बोरे पर टैग के साथ पंजीयन अंकित करना अनिवार्य होगा। इसका पालन न करने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और एफआईआर दर्ज होगी।
सुविधाओं के निर्देश
कलेक्टर ने सभी उपार्जन केंद्रों के प्रशासकों, समिति प्रबंधकों और खरीदी प्रभारियों को निर्देशित किया कि वे केंद्रों में इंटरनेट, कंप्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, विद्युत एवं जनरेटर की सुविधाएं उपलब्ध कराएं। साथ ही किसानों के लिए प्रतीक्षा कक्ष में दरी, कुर्सी, पेयजल, शौचालय और छाया की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
भ्रष्टाचार के आरोप और प्रशासन की चुनौती
हालांकि, जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। बीते वर्षों में धान की खरीदी और भंडारण में व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन आज तक कई गोदामों की उचित जांच नहीं हो पाई। रीवा जिले के कुछ गोदामों में बड़े प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर भारी मात्रा में अनाज संग्रहित होने की खबरें आई थीं। उदाहरण के लिए, घूम वेयरहाउस तहसील में कई गड़बड़ियों के प्रमाण मिल चुके हैं, लेकिन जब जांच की बारी आई, तो अधिकारियों ने हाथ खड़े कर दिए।
फर्जी पंजीयन और कालाबाजारी का खेल
इस वर्ष चना, मसूर, राय और गेहूं की खरीदी में भी धांधली की आशंका जताई जा रही है। काल्पनिक पंजीयन के जरिए किसानों के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, लेकिन प्रशासन इसे रोकने में नाकाम साबित हुआ है। खरीदी प्रक्रिया उन्हीं लोगों के हाथ में है, जो हर साल सेवा शुल्क लेकर मनमाने ढंग से कार्य करते हैं।
समितियों में अनियमितता
कई समितियों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। आज भी कई समितियों के रिकॉर्ड का कोई अता-पता नहीं है, लेकिन उन पर उन्हीं व्यक्तियों को दायित्व सौंपा गया है, जिनकी कार्यशैली पर सवाल उठते रहे हैं। इस कारण समितियां दिवालिया हो रही हैं, और सरकारी घोषणाएं केवल समाचार पत्रों तक ही सीमित रह जाती हैं।
प्रशासन पारदर्शिता और सख्ती के दावे कर रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के प्रयास अब तक नाकाफी साबित हुए हैं। किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए केवल निर्देश देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रभावी निगरानी और निष्पक्ष जांच भी आवश्यक है।

