अवैध उत्खनन पर न्यायालय के आदेशानुसार मऊगंज जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
कलेक्टर ने अवैध खनिज कारोबारी से 1.5 करोड़ रुपये की वसूली का दिया आदेश
विंध्य वसुंधरा समाचार मऊगंज 5 मार्च 2025
मऊगंज जिले के हनुमना तहसील के ग्राम गोपला में वर्षों से चल रहे अवैध उत्खनन पर न्यायालय के आदेशानुसार जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर अजय श्रीवास्तव के निर्देश पर प्रशासन ने अवैध उत्खनन में संलिप्त कारोबारी सुशील कुमार पटेल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पटेल पर आरोप है कि वह शासकीय भूमि से अवैध रूप से पत्थर निकालकर खुले बाजार में बेच रहा था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई कार्रवाई
क्षेत्र में लंबे समय से अवैध उत्खनन जारी था, लेकिन खनिज विभाग द्वारा प्रभावी कार्रवाई न किए जाने के कारण न केवल कीमती खनिज संपदा नष्ट हो रही थी, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही थी। स्थानीय ग्रामीणों ने इस अवैध गतिविधि को रोकने के लिए कई बार प्रशासन एवं खनिज विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हुई। अंततः ग्रामीणों ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की। न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और यह बड़ी कार्रवाई की गई।
डेढ़ करोड़ से अधिक की वसूली का आदेश
अवैध उत्खनन से हुए नुकसान की भरपाई के लिए जिला प्रशासन ने 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली का आदेश दिया है। इसके साथ ही, बीएनएस अधिनियम के तहत दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई से क्षेत्र में खनिज माफियाओं में हड़कंप मच गया है।कलेक्टर अजय श्रीवास्तव ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिले में अवैध उत्खनन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रकार की अवैध गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उधर, स्थानीय जनता ने इस कदम का स्वागत करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
खनिज एवं पर्यावरण विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गोपला गांव में वर्षों से अवैध उत्खनन जारी था, लेकिन खनिज विभाग एवं स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह सवाल उठता है कि आखिर इतने वर्षों तक खनिज माफिया किसके संरक्षण में काम कर रहे थे?
खनिज विभाग एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी आए दिन निरीक्षण के नाम पर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर अवैध खनन होते रहने के बावजूद कोई कार्रवाई न किया जाना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या यह संभव है कि प्रशासनिक अमले को इस अवैध कारोबार की भनक न लगी हो? यदि पता था, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि न केवल अवैध खनन करने वालों पर, बल्कि उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए, जिन्होंने वर्षों तक इस अवैध कारोबार को पनपने दिया। यह भी सच है कि मऊगंज एवं रीवा जिले में अभी भी कई अवैध खदानें संचालित हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मात्र औपचारिकता निभा रहे हैं।
क्या प्रशासन की यह कार्रवाई महज दिखावा है, या सच में अवैध खनन पर रोक लगेगी? यह देखने की बात होगी। लेकिन इतना तय है कि न्यायालय के आदेश पर की गई इस कार्रवाई से खनिज माफियाओं में हड़कंप जरूर मच गया है।


