नेवरिया-सुदूर सड़क बना राजनीति का अखाड़ा डिप्टी सीएम के नाम पर राजनीति गरमाई, निर्माण कार्य बाधित
रीवा जिले की ग्राम पंचायत सेदहा की नेवरिया सुदूर सड़क अब राजनीति का मैदान बन चुकी है। एक ओर जहां ग्रामीण वर्षों से बारहमासी सड़क का सपना देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत, नेता और ठेकेदारों के बीच खींचतान ने इस सपने को अधूरा छोड़ दिया है।
डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल के पूर्व निजी सचिव राजेश पाण्डेय पर ग्रामीणों को आपस में बाँटकर राजनीतिक हित साधने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि पाण्डेय ने गांव में ऐसा जहर घोला कि सड़क निर्माण कार्य ही रुक गया। गाँव दो गुटों में बंट गया है – एक गुट निर्माण के पक्ष में, दूसरा विरोध में।
पंचायत बनाम ठेकेदार: निर्माण एजेंसी पर विवाद
ग्राम पंचायत सेदहा की निर्वाचित सरपंच पूनम सिंह के प्रयासों से तीन सुदूर सड़कों को ग्राम पंचायत निर्माण एजेंसी के रूप में स्वीकृति मिली थी, जो 25 लाख से कम की थीं। शासन के नियमानुसार इन्हें पंचायत स्तर पर ही निर्माणित किया जाना था। लेकिन अब स्थानीय नेताओं और डिप्टी सीएम के प्रभाव से इन सड़कों को ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के तहत ठेकेदारी पद्धति से बनवाने की कवायद शुरू हो गई है।
सरपंच पूनम सिंह और कई गणमान्य नागरिकों ने इस पर आपत्ति जताई है कि बिना ग्राम सभा की अनुमति के टीएस (तकनीकी स्वीकृति) और निर्माण एजेंसी कैसे बदली जा सकती है।
भूमिपूजन, विरोध और विरोधाभास
दिलचस्प बात यह है कि जिन लोगों ने डिप्टी सीएम की मौजूदगी में सड़क निर्माण का भूमिपूजन कराया था, उन्हीं के हस्ताक्षर युक्त एक पत्र सामने आया है जिसमें पंचायत से निर्माण एजेंसी हटाने और ठेकेदारी पद्धति से कार्य कराने की मांग की गई है। इससे यह संदेह उत्पन्न हो रहा है कि क्या यह लोग गुमराह हैं या स्वयं डिप्टी सीएम को गुमराह कर रहे हैं।
राजनीतिक द्वेष ने रोक दिया विकास
पूर्व सरपंच राजमणि सिंह, भूतपूर्व प्रतिनिधि दिलराज सिंह, मानेन्द्र तिवारी समेत कई स्थानीय नागरिकों ने स्पष्ट कहा कि वर्तमान सरपंच के विकास कार्यों से कुछ लोग असहज हैं। वे नहीं चाहते कि यह कार्य पूरे हों, इसलिए साजिश के तहत निर्माण कार्यों को रोका जा रहा है।
बिना ग्राम सभा के टीएस बदले जाने पर सवाल
ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में बगैर अनुमोदन निर्माण एजेंसी बदलना पंचायतीराज व्यवस्था का खुला उल्लंघन है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही तो पंचायतें केवल नाम मात्र की इकाई रह जाएंगी और निर्माण कार्यों पर ठेकेदारों व नेताओं का वर्चस्व हो जाएगा।
क्या डिप्टी सीएम और सांसद ने निर्माण एजेंसी बदलने की पैरवी की?
सूत्रों के अनुसार, नेवरिया सुदूर सड़क निर्माण की तकनीकी स्वीकृति 20 लाख से बढ़ाकर 40.73 लाख की गई, जिससे पंचायत की सीमा पार हो गई और ठेका व्यवस्था लागू हो गई। कहा जा रहा है कि इसमें नेताओं और सांसद का हस्तक्षेप रहा, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जनप्रतिनिधियों को करना चाहिए सहयोग, न कि अड़चनें पैदा
गांव के लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि चुनी हुई सरपंच निर्माण कार्यों के लिए तैयार हैं तो फिर बार-बार रोड़ा क्यों अटकाया जा रहा है? क्या नेतागण गाँव की राजनीति में हस्तक्षेप कर पंचायत की स्वायत्तता को समाप्त करना चाहते हैं?
ग्राम पंचायतों को ठेकेदारों से अधिक बनाएं उत्तरदायी
स्थानीय जनमानस का मानना है कि ठेकेदारों की अपेक्षा ग्राम पंचायतें अधिक जवाबदेह और पारदर्शी होती हैं। पंचायतें यदि सही कार्य कर रही हैं तो उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, न कि उनके अधिकार छीने जाएँ।
क्या जून तक बन पाएगी नेवरिया सड़क?
जून के मध्य तक यदि सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो बारिश में गाँव कीचड़ से लथपथ हो जाएगा। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन-प्रशासन हस्तक्षेप कर इस विवाद को खत्म करेगा और वर्षों पुरानी सड़क की मांग को जल्द पूरा करेगा।






