नेवरिया गाँव की बहुचर्चित सड़क पर फिर अटका विकास का पहिया जिस सड़क का डिप्टी सीएम ने किया था भूमिपूजन, उसी निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने रोका
फर्जी हस्ताक्षरों वाला शिकायती पत्र हुआ वायरल, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल
ब्रेकिंग न्यूज़ | रीवा, मप्र | दिनांक 21 मई 2025
रीवा जिले के सेमरिया विधानसभा अंतर्गत आने वाले नेवरिया गाँव की बहुप्रतीक्षित सड़क निर्माण योजना एक बार फिर विवादों के घेरे में है। हाल ही में डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला द्वारा धूमधाम से जिस सड़क का भूमिपूजन किया गया था, उसी के निर्माण कार्य को अब स्थानीय ग्रामीणों द्वारा रोक दिया गया है। इस निर्णय ने न केवल ग्रामीण राजनीति में उबाल ला दिया है बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की भूमिका और कथित फर्जी शिकायत पत्रों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
भूमिपूजन के बाद क्यों रुका निर्माण कार्य?
नेवरिया और सेदहा गाँव के कुछ प्रतिनिधियों की एक फोटो हाल ही में वायरल हुई थी जिसमें वे डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के साथ भूमिपूजन के अवसर पर प्रसन्न मुद्रा में दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह फोटो उस समय की है जब यह दावा किया गया था कि सड़क निर्माण में आने वाली सभी बाधाएं दूर कर ली गई हैं। ग्रामवासियों ने मिठाई बाँटी, फूल-मालाएं पहनाईं और वर्षों पुरानी सड़क समस्या से निजात मिलने की आशा जताई।
लेकिन भूमिपूजन के कुछ ही दिनों बाद सोशल मीडिया पर एक शिकायती पत्र वायरल हुआ जिसमें उन्हीं ग्रामीणों — इन्द्रलाल तिवारी, संतोष उर्फ आरआई तिवारी, पुष्पराज तिवारी, सुरेश तिवारी, भीमसेन तिवारी, रमेश तिवारी, राजकुमार तिवारी आदि — के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, जिन्होंने पहले सड़क के पक्ष में हामी भरी थी। पत्र में मांग की गई है कि 25 लाख की लागत से बनने वाली पंचायत सड़क को रोका जाए और 40 लाख की लागत से बनने वाली आरईएस सड़क को ही प्राथमिकता दी जाए।
हस्ताक्षर फर्जी? हस्ताक्षरों के पैटर्न पर उठा संदेह
वायरल शिकायती पत्र में एक ही तरह के हस्ताक्षर पैटर्न को लेकर ग्रामीणों में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई है। कई ग्रामीणों का कहना है कि पत्र में दर्ज नामों में से कुछ लोगों ने वास्तव में हस्ताक्षर ही नहीं किए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि ये हस्ताक्षर फर्जी हैं तो फिर इस शिकायत के पीछे किसका हाथ है? क्या यह पूरा मामला सड़क निर्माण को रोकने के लिए गढ़ी गई एक राजनीतिक साजिश है?
भूमि अत्यजन की प्रक्रिया अधूरी — सच्चाई या बहाना?
शिकायती पत्र में यह भी तर्क दिया गया है कि कई भू-स्वामियों की भूमि का अत्यजन अभी तक नहीं हुआ है, जिससे निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सकता। जबकि सरपंच पूनम सिंह और ग्राम पंचायत के कई सदस्यों का कहना है कि अधिकांश भूमियों का स्वैच्छिक अत्यजन पहले ही करवा लिया गया था और ग्रामसभा में इसकी सहमति भी दर्ज है।
यहाँ यह सवाल भी उठता है कि जब डिप्टी सीएम ने खुद सड़क का भूमिपूजन कर दिया था, तब क्या उन्होंने अत्यजन प्रक्रिया की पुष्टि नहीं की थी? और यदि नहीं की थी, तो क्या यह भूमिपूजन केवल एक राजनीतिक दिखावा भर था?
25 लाख बनाम 40 लाख — सड़क निर्माण की ‘लागत राजनीति’
सूत्रों की मानें तो प्रारंभ में इस सड़क की स्वीकृति पंचायत स्तर पर 25 लाख की लागत से हुई थी। लेकिन कुछ प्रभावशाली ठेकेदारों और राजनैतिक हितग्राहियों द्वारा इस सड़क की लागत बढ़ाकर 40.73 लाख करवाई गई ताकि निर्माण का जिम्मा ग्राम पंचायत से हटाकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (आरईएस) को सौंपा जा सके। इस परिवर्तन से न केवल स्थानीय पंचायत की सहभागिता समाप्त हो गई, बल्कि निर्माण कार्य पर ठेकेदारों और दलालों का सीधा नियंत्रण सुनिश्चित हो गया।
राजनीतिक हस्तक्षेप और पत्रबाजी का खेल
ग्राम पंचायत सेदहा की सरपंच पूनम सिंह और उनके पति पुष्पराज सिंह ने बताया कि उन्होंने स्वयं डिप्टी सीएम से मिलकर निवेदन किया था कि सड़क निर्माण का कार्य ग्राम पंचायत से ही कराया जाए। शुरुआत में डिप्टी सीएम ने मौखिक रूप से इस पर सहमति भी जताई थी। लेकिन बाद में कुछ पूर्व विधायकों के करीबी और ठेकेदारों के प्रभाव में आकर बिना ग्रामसभा की अनुमति और पंचायत को सूचित किए ही डिप्टी सीएम और सांसद जनार्दन मिश्रा के लेटरहेड पर कार्य आरईएस को सौंपने संबंधी पत्र जारी कर दिए गए।
पूर्व पीए की भूमिका पर भी उठे सवाल
इस पूरे विवाद में डिप्टी सीएम के पूर्व पीए राजेश पांडेय की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि राजेश पांडेय अपने क्षेत्रीय राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति हेतु पंचायतों के मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं और विकास कार्यों को जानबूझकर प्रभावित कर रहे हैं।
अब सवाल यह — क्या बनेगी सड़क इस बरसात से पहले?
नेवरिया और लोहरा गाँव के आदिवासी और ग्रामीण इस पूरी राजनीतिक खींचतान के बीच सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। गर्मियों का सीजन लगभग समाप्ति की ओर है और जल्द ही नौतपा और मानसून का आगमन होने वाला है। यदि अगले एक-दो हफ्तों में सड़क निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो इस वर्ष भी ग्रामीणों को बरसात में कीचड़, असुविधा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित रहना पड़ेगा।
जनता का सवाल — विकास या दलाली?
स्थानीय लोग अब खुले तौर पर सवाल पूछ रहे हैं कि क्या विकास कार्यों में भी केवल दलाली, कमीशन और राजनीतिक हित ही सर्वोपरि हैं? क्या किसी गाँव की सड़क बनाने से पहले भी इतनी राजनीति की जाएगी कि लोगों को 75 वर्षों से अधिक इंतजार करना पड़े?
अब सबकी नजर डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला पर है — क्या वे तत्काल हस्तक्षेप कर सड़क निर्माण की दिशा में ठोस निर्णय लेंगे? या फिर यह सड़क भी केवल एक और 'राजनीतिक भूमिपूजन' बनकर रह जाएगी?






