रीवा में विदेशी घुसपैठियों की मौजूदगी की आशंका, संभागायुक्त ने दिए दस्तावेजों की जांच के निर्देश
बांग्लादेश व अन्य देशों से आए संदिग्ध व्यक्तियों की पड़ताल होगी तेज़, त्योथर में फर्जी मार्कशीट मामला बना आधार
रीवा।
रीवा जिले में बांग्लादेश एवं अन्य पड़ोसी देशों से अवैध रूप से आए संदिग्ध व्यक्तियों की मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस विषय को लेकर अधिवक्ता बी.के. माला द्वारा रीवा संभाग के आयुक्त को एक पत्र सौंपा गया था, जिसमें जिले में विदेशी नागरिकों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिकता, शैक्षणिक योग्यता और शासकीय लाभ लेने की आशंका जताई गई है। पत्र में मांग की गई है कि रीवा जिले में रह रहे ऐसे सभी संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की जाए और उनके दस्तावेजों की वैधता की गहन जांच कराई जाए।
इस पत्र को संज्ञान में लेते हुए संभागायुक्त रीवा ने कलेक्टर रीवा को निर्देशित किया है कि जिले में रह रहे बांग्लादेश और अन्य देशों से आए संदिग्ध व्यक्तियों के अभिलेखों की जांच तत्काल करवाई जाए। विशेषकर उन व्यक्तियों की, जिन्होंने भारतीय नागरिक के रूप में खुद को स्थापित करने हेतु शैक्षणिक संस्थाओं में नामांकन लिया हो, रोजगार प्राप्त किया हो या सरकारी योजनाओं का लाभ लिया हो।
त्योथर में बांग्लादेशी नागरिक द्वारा फर्जी मार्कशीट मामला बना आधार
इस जांच की पृष्ठभूमि में एक चौंकाने वाला मामला भी है। बताया गया कि पूर्व में बांग्लादेश से आया एक व्यक्ति दिलावर खान रीवा जिले के त्योथर तहसील क्षेत्र में निवास कर रहा था। उसने मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (एमपी बोर्ड) की फर्जी अंकसूची तैयार करवाई थी, जिसके आधार पर उसने अन्य आवश्यक प्रमाण-पत्र जैसे निवास, जाति, जन्मतिथि और आधार कार्ड तक बनवा लिए थे। इस फर्जीवाड़े के बल पर वह न केवल भारत में रह रहा था बल्कि सरकारी सुविधाओं का भी लाभ उठा रहा था।
यह प्रकरण इस ओर इशारा करता है कि त्योथर ही नहीं, बल्कि रीवा जिले के अन्य इलाकों में भी ऐसे विदेशी नागरिक हो सकते हैं जो फर्जी दस्तावेजों के जरिए नागरिक बन बैठे हैं। यदि ऐसे लोगों की समय रहते पहचान नहीं की गई तो यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक सिद्ध हो सकता है।
बी.के. माला की मांग और प्रशासन के समक्ष चुनौती
वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. माला ने प्रशासन से मांग की है कि जिले में निवास कर रहे प्रत्येक संदिग्ध व्यक्ति के दस्तावेजों की पुनः जांच की जाए। विशेषकर:
शैक्षणिक संस्थानों में दाखिला लेने वालों की मार्कशीट व जन्म प्रमाण पत्र
आधार कार्ड, मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड और निवास प्रमाण-पत्र
रोजगार हेतु बनाए गए प्रमाण-पत्र व नियुक्तियों में प्रयुक्त दस्तावेज
किराएदारों एवं बाहरी निवासियों का सत्यापन
बी.के. माला ने कहा कि यदि इन दस्तावेजों की जांच नहीं हुई तो भविष्य में ऐसे लोग समाज के लिए सुरक्षा संकट बन सकते हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह तत्काल एक विशेष जांच टीम गठित करे जिसमें पुलिस, खुफिया एजेंसियां, शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी सम्मिलित हों, ताकि बहुआयामी जांच सुनिश्चित हो सके।
सवाल यह भी — क्या कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है?
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि क्या रीवा जिले में कोई फर्जी दस्तावेज तैयार कराने वाला गिरोह सक्रिय है, जो बाहरी नागरिकों को भारतीय बनाकर सरकारी योजनाओं का लाभ दिला रहा है? यदि ऐसा है तो इसकी जड़ तक पहुंचना नितांत आवश्यक है, ताकि इस तरह की अवैध गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।


