आख़िरकार बंद हुआ मौत का बोरवेल: 'विंध्य वसुंधरा समाचार' की खबर का असर, प्रशासन हरकत में आया
मासूमों की जान पर मंडरा रहे खतरे को आखिरकार टाल दिया गया। मनगवां तहसील की ग्राम पंचायत गढ़ स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में एक साल से खुला पड़ा खतरनाक बोरवेल, 'विंध्य वसुंधरा समाचार' की गंभीर रिपोर्टिंग के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप से बंद कर दिया गया। यह कार्यवाही नायब तहसीलदार मनोज सिंह के निर्देश पर पंचायत एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
यह वही बोरवेल है जिसे लेकर क्षेत्रीय लोग महीनों से आशंकित थे। व्यस्त तिराहे के पास स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में प्रतिदिन आने वाले नन्हें बच्चों, किशोरी बालिकाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए यह बोरवेल एक मौन मृत्यु की आशंका जैसा बन चुका था। बच्चों के खेलते समय उस ओर दौड़ जाने की घटनाएं रोज की बात थीं। बावजूद इसके प्रशासनिक अमला मौन रहा — जब तक कि 'विंध्य वसुंधरा समाचार' ने 1 जुलाई 2025 को यह संवेदनशील खबर प्रकाशित की।
खबर छपी, जिम्मेदार जगे — 1 घंटे में कार्रवाई
समाचार प्रकाशन 1 जुलाई 2025 के 1 घंटे बाद अनुविभागीय अधिकारी राजस्व पी एस त्रिपाठी नायब तहसीलदार मनोज सिंह के निर्देश पर पंचायत एवं राजस्व जमीनी अमला पहुंच कर खुले बोरवेल को बंद कराया कूप एवं की गई जिम्मेदारो के ऊपर क्या कार्यवाही हुई है। यह पता नहीं है। ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संबंधित विभागों को निर्देशित किया। निर्देश के कुछ घंटों के भीतर कर्मचारियों की टीम मौके पर पहुंची और बोरवेल को मिट्टी-पत्थर से भरकर बंद कर दिया गया ।
प्रशासन की तत्परता सराहनीय, पर सवाल बाकी
जहां यह राहत की बात है कि एक संभावित हादसा टाल दिया गया, वहीं यह सवाल अब भी गंभीर है कि इतने स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बोरवेल एक साल तक खुला क्यों रहा? ज़िला कलेक्टर द्वारा पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन क्यों नहीं हुआ? क्या इस घोर लापरवाही के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी?
मीडिया की भूमिका फिर साबित
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि जब मीडिया जनहित के मुद्दों को निडरता और ज़िम्मेदारी के साथ उठाता है, तो शासन-प्रशासन को हरकत में आना ही पड़ता है। 'विंध्य वसुंधरा समाचार' की पड़ताल न होती, तो यह बोरवेल किसी दिन एक मासूम की जान ले सकता था
अब ज़रूरत है कि ऐसे सभी आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की व्यापक जांच हो और सुधार के स्थायी उपाय सुनिश्चित किए जाएं, ताकि बच्चों की सुरक्षा केवल हादसों के बाद नहीं, पहले से ही सुनिश्चित की जा सके


