सुशासन ही सरकार का संकल्प : ‘समाधान ऑनलाइन’ में 12 जिलों के प्रकरणों की सुनवाई मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दी सख्त हिदायत, दोषियों पर त्वरित कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने सोमवार को ‘समाधान ऑनलाइन’ कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश के 12 जिलों — बालाघाट, उमरिया, देवास, भिण्ड, पन्ना, शहडोल, मऊगंज, कटनी, पांढुर्णा, टीकमगढ़, रायसेन और दमोह — से जुड़े विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई की। इस दौरान उन्होंने न केवल आवेदकों से सीधे संवाद किया बल्कि लंबित मामलों की स्थिति की विस्तृत जानकारी भी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सुशासन ही हमारी सरकार का मूल लक्ष्य है। जनता को कहीं भटकना न पड़े, समस्याओं का समाधान स्थानीय स्तर पर हो और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत पहुंचने की नौबत ही न आए, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि योजनाओं का समय-सीमा में क्रियान्वयन और शिकायतों का त्वरित निराकरण प्रत्येक जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक की प्राथमिकता होनी चाहिए।
दोषियों पर गिरी गाज
कार्यक्रम में शिकायतों की सुनवाई के बाद कई गंभीर मामलों में तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की गई। इनमें —
संविदा लेखापाल की सेवाएं समाप्त करने,
अधिकारियों की वेतनवृद्धि रोकने,
चार पटवारियों को निलंबित करने,
चार तहसीलदारों के विरुद्ध कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने,
तथा एक वन मंडलाधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने जैसी सख्त कार्रवाइयाँ शामिल रहीं।
इसके अलावा, अन्य मामलों में भी दोषियों पर कार्यवाही सुनिश्चित की गई। मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि लापरवाही, उदासीनता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सुशासन का स्पष्ट संदेश
कार्यक्रम से एक बार फिर यह संदेश गया कि सरकार नागरिकों की समस्याओं के प्रति सजग और जवाबदेह है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि “लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता से सुनें और उनका त्वरित समाधान करें। यदि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का निपटारा नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी ही जवाबदेह होंगे।”
जनता के सामने पारदर्शी और संवेदनशील शासन प्रस्तुत करने की इस पहल को शासन-प्रशासन के बीच जवाबदेही और ईमानदारी की कसौटी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘समाधान ऑनलाइन’ जैसे कार्यक्रम प्रशासन को सीधे जनता के संपर्क में लाने का माध्यम बन रहे हैं, जिससे न केवल लोगों का भरोसा बढ़ रहा है बल्कि अधिकारियों पर भी जिम्मेदारी का दबाव बन रहा है।



