रीवा में अजब गजब मामला रातों-रात ‘गायब’ हो गया 25 लाख का तालाब, खोजने वाले को मिलेगा इनाम
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों और प्रशासन दोनों को सकते में डाल दिया है। त्योंथर तहसील के ग्राम पंचायत पूर्वा मनीराम में करीब 25 लाख रुपये की लागत से बना ‘अमृत सरोवर’ तालाब अचानक गायब हो गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि तालाब का निर्माण प्रस्तावित जमीन पर नहीं हुआ और अब जब जांच की जा रही है तो इसे “तालाब चोरी” का नाम दिया जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप – तालाब बना ही नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि शासन की योजना के तहत अमृत सरोवर तालाब बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन निर्माण कार्य दूसरी जगह कर दिया गया। इसी कारण अब वहां तालाब दिख नहीं रहा। गांव में बाकायदा मुनादी कराई गई कि “जो भी तालाब खोजकर बताएगा, उसे इनाम दिया जाएगा।” यह मुनादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
जमीनी हकीकत – अतिवृष्टि से बह गया पानी
नईदुनिया की पड़ताल में सामने आया कि तालाब वास्तव में बना जरूर था, लेकिन जुलाई माह में हुई अतिवृष्टि और मिट्टी के कटाव के कारण इसकी सुरक्षात्मक दीवार टूट गई, जिससे तालाब का सारा पानी बह गया। मौके पर अभी भी तालाब की आकृति मौजूद है और लगभग 4.5 मीटर ऊंची मिट्टी की दीवार टूटी हुई दिखाई दे रही है।
कई बार हो चुकी जांच
इस मामले की अब तक तीन बार जांच हो चुकी है। अब चौथी बार रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने एसडीएम को प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जिला पंचायत की जांच में बताया गया कि तालाब शासन की जमीन पर ही बना है, लेकिन बारिश के कारण दीवार टूटने से उसका पानी बह गया।
सरपंच पर आरोप
ग्राम पंचायत के सरपंच धीरेश तिवारी पर भी सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने निजी भूमि का उपयोग कर योजना को गलत तरीके से लागू किया। इस पर जिला पंचायत ने सरपंच को नोटिस भी जारी किया था। हालांकि बाद में भूमि स्वामी शैलेंद्र तिवारी सहित अन्य तीन लोगों ने अपनी जमीन शासन को दान कर दी, जिसके बाद प्रशासन ने निर्माण को सही ठहराया।
कलेक्टर का बयान
रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल का कहना है कि “अमृत सरोवर का निर्माण हुआ था। हाल ही में आई अतिवृष्टि के कारण तालाब की दीवार फूट गई और पानी बह गया। तालाब चोरी होने जैसी कोई बात नहीं है।”
ग्रामीण अब भी असंतुष्ट
प्रशासन के स्पष्टीकरण के बावजूद ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि अगर सही जगह तालाब बना होता तो आज वह पानी से लबालब रहता। उनकी मांग है कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

