विंध्य विकास संकल्प सम्मेलन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रखी विकास की नई नींव
125 करोड़ की लागत से कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का भूमिपूजन, औद्योगिक निवेश और स्वदेशी अभियान पर जोर
विंध्य क्षेत्र की धरती शुक्रवार को ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रीवा जिले के त्योंथर पहुँचे और भव्य "विंध्य विकास संकल्प सम्मेलन" एवं विभिन्न निर्माण कार्यों के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। यह अवसर सिर्फ सरकारी योजनाओं के उद्घाटन या शिलान्यास का नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच था जहां मुख्यमंत्री ने विंध्य क्षेत्र के उज्ज्वल भविष्य की रूपरेखा भी प्रस्तुत की।
आत्मीय स्वागत और पुष्पवर्षा
मुख्यमंत्री का आगमन होते ही कार्यक्रम स्थल पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। मंच तक पहुँचने से पहले रास्ते में फूलों की वर्षा कर जनता ने अपने नेता का अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कराकर हाथ हिलाया और जनसमूह का अभिवादन स्वीकार किया।
कार्यक्रम स्थल पर परंपरागत तरीके से ढोल-नगाड़ों और बैंड बाजे की धुन पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया गया। महिलाएँ थालियों में आरती सजाकर खड़ी थीं और युवाओं ने "विकास ही संकल्प" के नारे लगाए।
कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का भूमिपूजन: ग्रीन एनर्जी की दिशा में बड़ा कदम
सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण था 125 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाले कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट का भूमिपूजन। मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना कर शिलान्यास किया और कहा कि यह परियोजना न सिर्फ ऊर्जा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि इससे किसानों और युवाओं दोनों को सीधा लाभ मिलेगा।
डॉ. यादव ने बताया कि यह प्लांट कृषि अपशिष्ट और पशु अपशिष्ट से गैस तैयार करेगा। इस गैस का उपयोग उद्योग, परिवहन और घरेलू स्तर पर हो सकेगा। उन्होंने कहा –
"विंध्य की धरती पर ग्रीन एनर्जी का यह प्रयास आने वाले वर्षों में पूरे प्रदेश के लिए आदर्श बनेगा। किसान अपनी पराली और गोबर बेचकर आय अर्जित करेंगे, वहीं युवाओं को रोज़गार के नए अवसर प्राप्त होंगे।"
विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्लांट से प्रतिदिन लगभग 50 टन बायोगैस का उत्पादन होगा और इससे स्थानीय स्तर पर ऊर्जा संकट को कम करने में मदद मिलेगी।
औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य केवल घोषणाएँ करना नहीं है, बल्कि औद्योगिक निवेश को धरातल पर उतारना है। उन्होंने कहा कि विंध्य क्षेत्र में खनिज संपदा, कृषि उत्पाद और मानव संसाधन की प्रचुरता है, जिसे उद्योगों के माध्यम से रोजगार में बदला जा सकता है।
उन्होंने उपस्थित उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से सभी तरह की अनुमतियाँ शीघ्र उपलब्ध कराएगी। साथ ही उद्योगों के लिए आवश्यक अधोसंरचना – बिजली, पानी और सड़क की सुविधा प्राथमिकता पर सुनिश्चित की जाएगी।
सशक्त भारत, समर्थ भारत और स्वदेशी का मंत्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश भी उसी दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा –
"हमारा मंत्र है – सशक्त भारत, समर्थ भारत। यह तभी संभव है जब हम स्वदेशी पर बल देंगे। विंध्य क्षेत्र को स्वदेशी उत्पादन का केंद्र बनाने का संकल्प लिया गया है। किसानों की उपज, स्थानीय कारीगरों का हुनर और यहाँ की प्राकृतिक संपदा – इन सबको मिलाकर हम आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेंगे।"
शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क विकास पर जोर
मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार विंध्य क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए संस्थान खोलने की बात कही।
शिक्षा के क्षेत्र में: उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों और तकनीकी शिक्षा केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी, ताकि विंध्य के युवाओं को बाहर न जाना पड़े।
स्वास्थ्य सेवाएँ: उन्होंने मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में सुविधाएँ बढ़ाने का ऐलान किया।
सड़क और परिवहन: मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार विंध्य क्षेत्र को राजधानी और अन्य बड़े शहरों से जोड़ने वाली सड़कों का विस्तार प्राथमिकता पर कर रही है।
नागरिकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे। किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और उद्योगपतियों ने मुख्यमंत्री की घोषणाओं का तालियों की गड़गड़ाहट से स्वागत किया।
रामसजीवन पटेल, जो त्योंथर के किसान हैं, ने कहा –
"अगर बायोगैस प्लांट सही तरीके से चल पड़ा तो हमें पराली और गोबर बेचने से अतिरिक्त आय होगी। यह हमारे लिए खेती से जुड़ा सबसे बड़ा तोहफा है।"
वहीं सुषमा सिंह, महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य ने कहा –
"स्वदेशी अभियान से हमारे छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। महिलाएँ भी अब स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।"
विंध्य क्षेत्र की चुनौतियाँ और उम्मीदें
हालाँकि सम्मेलन में उत्साह और घोषणाओं का माहौल था, लेकिन स्थानीय लोगों की अपेक्षाएँ भी बड़ी हैं। लंबे समय से विंध्य क्षेत्र में औद्योगिक पिछड़ापन, बेरोज़गारी, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और पलायन जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं।
इस मौके पर राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि यदि सरकार की ये घोषणाएँ कागज़ से निकलकर ज़मीन पर उतरती हैं, तो निश्चित रूप से विंध्य का कायाकल्प होगा।




