🌾 मध्यप्रदेश सरकार ने गेहूं-धान खरीदी से पीछे खींचे हाथ, मुख्यमंत्री का केंद्र को पत्र — किसानों में रोष 🌾
मध्यप्रदेश के किसानों के लिए चिंताजनक खबर है। प्रदेश सरकार ने अब गेहूं और धान की सरकारी खरीदी (समर्थन मूल्य पर उपार्जन) से अपना हाथ पीछे खींचने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस संबंध में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखकर प्रदेश को केंद्रीयकृत उपार्जन योजना के अंतर्गत लाने की अनुशंसा की है।
मुख्यमंत्री द्वारा लिखे पत्र में कहा गया है कि राज्य में वर्ष 1999-2000 से समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीदी की जा रही थी, जिससे किसानों को बड़ा सहारा मिला और गरीब जनता को सस्ते अनाज की उपलब्धता भी बनी रही। परंतु अब लगातार बढ़ते उपार्जन और भुगतान में आ रही कठिनाइयों के कारण प्रदेश सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश में इस वर्ष 77.74 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 43.49 लाख मीट्रिक टन धान का उपार्जन हुआ है, लेकिन भंडारण, परिवहन और भुगतान में भारी आर्थिक बोझ के चलते सरकार पर 72,177 करोड़ रुपये से अधिक का दबाव बन गया है। मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया है कि अब यह जिम्मेदारी भारतीय खाद्य निगम (FCI) को सौंपी जाए।
हालांकि, इस निर्णय से किसानों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि खरीदी की जिम्मेदारी FCI को दी गई, तो गुणवत्ता मानकों के नाम पर लाखों क्विंटल अनाज रिजेक्ट हो जाएगा, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। निजी व्यापारियों के हाथों में अनाज की बिक्री जाने से किसानों को अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ेगी।
किसान संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय को किसानों के हितों के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि यह कदम प्रदेश के लाखों किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार है और सरकार को इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।

