कोहरे और अव्यवस्था ने ली एक और जान, राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रक दुर्घटना में खलासी की मौत
रीवा। राष्ट्रीय राजमार्ग पर घना कोहरा, सड़क किनारे खड़े वाहन और प्रशासनिक लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। रविवार 14 दिसंबर 2025 की सुबह ट्रक क्रमांक MP17HH 4027 नईगढ़ी की ओर ईंट लेकर रवाना हुआ था। घने कोहरे के कारण चालक रास्ता भटक गया और आगे निकल गया, इसी दौरान सामने चल रहे एक अन्य ट्रक से पीछे से भीषण टक्कर हो गई।
इस हादसे में ट्रक के खलासी विपिन कुमार जैसवाल (पिता इंद्रलाल जैसवाल), निवासी घुमा, थाना गढ़ क्षेत्र, गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल गंगेव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया जहां स्थित गंभीर होने पर रीवा रेफर किया गया। इलाज के दौरान शाम करीब 5 बजे उनकी मृत्यु हो गई। ट्रक चालक रमेश कुमार पटेल प्रयागराज से ईंट लेकर आए थे।
यह हादसा केवल एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर फैली अव्यवस्था और आदेशों की अनदेखी का गंभीर उदाहरण है। उल्लेखनीय है कि रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल द्वारा पूर्व में स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि राष्ट्रीय राजमार्ग 30 एवं 35 पर कटे हुए डिवाइडर बंद किए जाए, पटरियों पर ढाबों-होटलों के सामने वाहन खड़े न हों, अतिक्रमण हटाया जाए, सर्पाकार सड़कों को फोरलेन मानकों के अनुरूप सुधारा जाए, आवारा मवेशियों को सड़क से हटाया जाए तथा खराब या दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को तत्काल हटाया जाए।
लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी राजमार्गों पर 24-24 घंटे तक खराब और दुर्घटनाग्रस्त वाहन खड़े रहते हैं। सर्दियों में कोहरा पड़ते ही यही वाहन मौत का कारण बन जाते हैं। एमपीआरडीसी पर भी अपने दायित्वों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। पिछले छह वर्षों से कई हिस्सों में सर्विस रोड का निर्माण अधूरा है, जिससे स्थानीय वाहन तेज रफ्तार राजमार्ग पर चलने को मजबूर हैं।
अब जब दिसंबर-जनवरी में कोहरा और घना होगा और माघ मेला जैसे बड़े आयोजन भी होंगे, तब हादसों का खतरा और बढ़ जाएगा। इसके बावजूद जिला प्रशासन के आदेश अधिकांशतः कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। पहले भी निर्देश जारी हुए थे कि ढाबों और राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे ट्रक खड़े नहीं होंगे, ताकि दुर्घटनाएं रोकी जा सकें, लेकिन उन आदेशों का पालन होता नहीं दिख रहा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कितनी और जानें जाएंगी? क्या रीवा जिले के जनप्रतिनिधि, सांसद, राज्य सरकार और जिला प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर ठोस और तत्काल कार्रवाई करेंगे, या फिर हर हादसे के बाद केवल नए आदेश जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया जाएगा? यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो राष्ट्रीय राजमार्गों पर हादसों का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।

