गढ़–लालगांव रोड निर्माण में खुला भ्रष्टाचार का खेल, घटिया सामग्री से हो रहा “काग़ज़ी विकास”
गढ़–लोरी मोड़ से लालगांव तक प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत कराए जा रहे सड़क निर्माण एवं मरम्मत कार्य में भ्रष्टाचार की परतें खुलकर सामने आने लगी हैं। वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी इस सड़क का निर्माण शुरू होते ही ग्रामीणों की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन अब यह कार्य भी घोर लापरवाही और गुणवत्ता विहीन निर्माण का जीता-जागता उदाहरण बनता जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क में डामर और गिट्टी की परतें जानबूझकर बेहद पतली डाली जा रही हैं। निर्माण स्थल पर न तो मानक अनुसार मोटाई रखी जा रही है और न ही सामग्री की गुणवत्ता की कोई जांच हो रही है। सड़क की हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह सड़क जनता के लिए नहीं, बल्कि केवल भुगतान निकालने के लिए बनाई जा रही हो।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सड़क की बदहाली पिछले लगभग 15 वर्षों से ग्रामीणों के लिए अभिशाप बनी हुई थी, वही सड़क अब फिर से कुछ महीनों में टूटने को मजबूर दिख रही है—वह भी निर्माण के दौरान ही। जगह-जगह उखड़ती सतह और कमजोर पकड़ इस बात की गवाही दे रही है कि निर्माण कार्य सिर्फ दिखावे तक सीमित है।
गौरतलब है कि इस सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर पूर्व में कई बार समाचार पत्रों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रमुखता से खबरें प्रकाशित एवं प्रसारित की जा चुकी हैं। मीडिया के दबाव के बाद प्रशासन हरकत में तो आया, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि अब सड़क निर्माण के नाम पर खुला भ्रष्टाचार चल रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में न तो तकनीकी अधिकारियों की नियमित निगरानी हो रही है और न ही ठेकेदार पर कोई नियंत्रण है। सवाल यह भी उठ रहा है कि घटिया निर्माण होने के बावजूद संबंधित विभाग की चुप्पी आखिर किस ओर इशारा कर रही है? क्या यह मिलीभगत का मामला है?
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, निर्माण कार्य में प्रयुक्त सामग्री की प्रयोगशाला जांच हो तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो यह सड़क भ्रष्टाचार की एक और स्मारक बनकर रह जाएगी।
जनता अब सवाल पूछ रही है—क्या प्रधानमंत्री सड़क योजना का पैसा सड़क बनाने में लग रहा है या भ्रष्टाचार की सड़क तैयार की जा रही है?


