बहाली के बाद फिर विवादों में घिरे स्कूल प्राचार्य नशे की हालत में विद्यालय पहुंचने का वीडियो वायरल, शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
जिले के उचेहरा विकासखंड अंतर्गत परसमनिया पहाड़ क्षेत्र स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरेही एक बार फिर विवादों में आ गया है। विद्यालय के प्राचार्य जयपाल दिनकर पर बहाली के बाद दोबारा शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस संबंध में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गौरतलब है कि बीते माह भी प्राचार्य जयपाल दिनकर का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वे कथित तौर पर नशे की हालत में सड़क पर बेसुध पड़े नजर आए थे। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा उन्हें निलंबित कर दिया गया था। उस समय यह मामला जिलेभर में चर्चा का विषय बना रहा।
प्रशासनिक कार्रवाई के बाद हाल ही में उनकी बहाली की गई और आश्चर्यजनक रूप से उन्हें पुनः उसी विद्यालय का प्रभार सौंप दिया गया। हालांकि बहाली के कुछ ही समय बाद एक नया वीडियो सामने आने से न केवल अभिभावकों बल्कि आमजन में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है।
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि प्राचार्य नशे की हालत में विद्यालय परिसर में मौजूद थे। हालांकि इस वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इसके सामने आने के बाद अभिभावकों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि ऐसे व्यक्ति के हाथों में बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है और शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस अधिकारी पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हों, उसे दोबारा उसी विद्यालय में कैसे पदस्थ किया गया। क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी तरह का संरक्षण? इस निर्णय ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र उपमुख्यमंत्री के गृह जिले के समीप बताया जा रहा है। ऐसे में विपक्ष और आम नागरिक सरकार पर यह आरोप लगा रहे हैं कि कहीं राजनीतिक संरक्षण के चलते कार्रवाई से बचाने का प्रयास तो नहीं किया जा रहा।
अब देखना यह होगा कि वायरल वीडियो के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन क्या रुख अपनाता है। क्या एक बार फिर जांच के आदेश दिए जाएंगे और सख्त कार्रवाई होगी, या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। जनता के मन में यही सवाल है कि क्या ऐसे घटनाक्रम यूं ही सामने आते रहेंगे, या फिर शिक्षा व्यवस्था की साख बचाने के लिए ठोस और निष्पक्ष कदम उठाए जाएंगे।

