मऊगंज में अवैध खनन का काला साम्राज्य: कैमरे के सामने बेनकाब, पत्रकार पर हमला
मऊगंज/हनुमना। मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले में अवैध खनन का काला कारोबार अब खतरनाक मोड़ ले चुका है। मीडिया की पड़ताल में हनुमना क्षेत्र के लोढ़ी सहित दर्जनों गांवों में सैकड़ों अवैध खदानों का बड़ा नेटवर्क उजागर हुआ है, जहां पहाड़ों को चीरकर पत्थर की चीप, पटिया और ढोका का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है।
तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं कि किस तरह जंगलों और पहाड़ों को छलनी कर दिया गया है। जहां नजर डालो, वहां गहरी खाइयां, टूटे पहाड़ और उजड़े वन क्षेत्र दिखाई देते हैं। भारी मशीनों से पत्थर निकाले जा रहे हैं और ट्रकों में भरकर उत्तरप्रदेश और बिहार तक सप्लाई की जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहा है।
एनजीटी के आदेश बेअसर, माफिया बेलगाम
पर्यावरणीय नियमों और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के दिशा-निर्देशों के बावजूद क्षेत्र में अवैध उत्खनन बेरोकटोक जारी है। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। वन विभाग का अमला दबाव में बताया जा रहा है, जबकि खनिज विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची तो अवैध खनन में लगी मशीनें अचानक बंद कर दी गईं। कुछ ही देर में मशीनें हटाने की कोशिश की गई और मौके पर मौजूद लोग भागने लगे। लेकिन इसके बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और कथित खनन माफियाओं द्वारा मीडिया टीम के साथ झूमाझटकी की गई। स्थिति इतनी बिगड़ी कि सुरक्षा के मद्देनजर टीम को वहां से निकलना पड़ा।
यह घटना दर्शाती है कि अवैध खनन का संगठित और प्रभावशाली नेटवर्क सक्रिय है, जो कानून को खुली चुनौती दे रहा है।
करोड़ों के राजस्व का नुकसान, प्रशासन पर सवाल
हनुमना क्षेत्र में बिना अनुमति संचालित इन सैकड़ों खदानों से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। बावजूद इसके, कार्रवाई कागजों तक सीमित नजर आती है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर इन अवैध खदानों पर सख्त कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही है या फिर दबाव?
सांसद का सख्त संदेश
जनार्दन मिश्रा (रीवा सांसद) ने अवैध खनन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि क्षेत्र में किसी भी तरह की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कानून हाथ में लेने वालों को उनकी सही जगह भेजा जाएगा।
उन्होंने प्रशासन को सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही और चेतावनी दी कि यदि खनन माफिया नहीं रुके तो कठोर कदम उठाए जाएंगे। सांसद ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
अधिवक्ता ने की उच्चस्तरीय शिकायत
वरिष्ठ अधिवक्ता बी.के. माला ने इस पूरे मामले की शिकायत मऊगंज कलेक्टर से लेकर रीवा संभाग के आयुक्त तक की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पत्थर का उत्खनन हो रहा है, जिससे शासन को भारी राजस्व क्षति और पर्यावरण को गंभीर नुकसान हो रहा है।
बी.के. माला का कहना है कि कई बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने अवैध खदानों की तत्काल जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों में भय, पर्यावरण पर संकट
ग्रामीणों, विशेषकर आदिवासी महिलाओं ने भी भय और असुरक्षा का माहौल होने की बात कही है। उनका कहना है कि लगातार हो रहे विस्फोट और मशीनों की आवाज से जनजीवन प्रभावित हो रहा है, वहीं जलस्रोतों पर भी असर पड़ रहा है।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो मऊगंज के पहाड़ और जंगल पूरी तरह खोखले हो सकते हैं।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है। क्या अवैध उत्खनन के इस काले साम्राज्य पर लगाम लगेगी या फिर मऊगंज के पहाड़ यूं ही उजड़ते रहेंगे?

