रीवा, मध्य प्रदेश, 15 नवंबर 2024
रीवा संभाग में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अराजकता चरम पर हैं। सरकारी दफ्तरों में पड़ी हजारों शिकायतें धूल खा रही हैं, वहीं जनता के बीच यह नाराजगी भी है कि संभाग के उच्चतम अधिकारी आमजन की समस्याओं को सुनने में रुचि नहीं रखते। सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी का आरोप है कि रीवा संभाग के आयुक्त बीएस जामोद अपने दायित्वों से विमुख होकर केवल औपचारिक बैठकों में व्यस्त रहते हैं और आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं हैं।
लंबित शिकायतों का अंबार – जनता परेशान, प्रशासन बेपरवाह
शिवानंद द्विवेदी के अनुसार, रीवा संभागीय कार्यालय में हज़ारों की संख्या में शिकायतें पड़ी हुई हैं जिनमें कई गंभीर मामले भी शामिल हैं। लोग सुबह से शाम तक अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद में कार्यालय में बैठे रहते हैं, परंतु कमिश्नर साहब उन्हें सुनने का समय भी नहीं देते। कई लोग हफ्तों तक चक्कर काटते रहते हैं, परंतु उनकी समस्याओं का निराकरण दूर की बात है, कमिश्नर साहब से भेंट तक नहीं हो पाती।
कमिश्नर कार्यालय की शिकायत शाखा का कार्य केवल शिकायत पत्र जारी करने तक सीमित हो गया है। न तो इन पत्रों की आगे कोई जांच होती है और न ही शिकायतों का उचित निपटारा। ऐसे में शिकायतकर्ता थक-हार कर वापस लौट जाते हैं, और उनकी समस्याएं जस की तस रह जाती हैं।
भ्रष्टाचार के गंभीर मामले – हर क्षेत्र में अनियमितताएं, पर कार्रवाई नहीं
रीवा संभाग में भ्रष्टाचार के मामले भी बड़े पैमाने पर उभरकर सामने आ रहे हैं। शिवानंद द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि क्षेत्र में करोड़ों रुपये का चावल घोटाला, आबकारी और खनिज घोटाला जैसे गंभीर अनियमितताओं के मामले उजागर हुए हैं। हाल ही में जल जीवन मिशन के तहत 130 करोड़ रुपये का घोटाला जवा ब्लॉक की पंचायतों में सामने आया, जिसमें अधिकारियों ने योजनाओं का दुरुपयोग किया। हालांकि इस मामले की फाइलें दबा दी गईं और इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई।
शिवानंद का आरोप है कि इन सभी गंभीर मामलों पर आयुक्त का ध्यान न होने से भ्रष्टाचारियों के हौसले बुलंद हैं।
प्रशासनिक अराजकता – मीटिंग्स में व्यस्त अधिकारी, जनता के लिए नहीं है समय
शिवानंद का कहना है कि संभागीय कार्यालय में हर ओर 'मीटिंग्स का खेल' चल रहा है। कभी किसी नेता से मुलाकात, तो कभी किसी मीटिंग में शामिल होना, आयुक्त का सारा समय इन्हीं औपचारिकताओं में बीत जाता है। ऐसे में आमजन की समस्याएं उपेक्षित रह जाती हैं। आरोप यह भी है कि कमिश्नर साहब पर सत्ताधारी मंत्रियों और विधायकों की जी-हुजूरी का अधिक दबाव है, जिसके कारण वे जनता की समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे पाते।
क्या जनता की आवाज सुनेंगे कमिश्नर?
रीवा संभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ जनता और समाजसेवी अब कमिश्नर से यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए इस अराजक स्थिति को सुधारने का प्रयास करेंगे। लोग चाह रहे हैं कि कमिश्नर साहब सीधे तौर पर जनता की समस्याओं को सुनें और लम्बित शिकायतों का निपटारा करें। साथ ही, भ्रष्टाचार के मामलों में भी सख्त कार्रवाई करें।
समाजसेवी द्विवेदी का कहना है कि प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों का मुख्य कर्तव्य आमजन की समस्याओं का समाधान करना है। जनता अब यह देखने की प्रतीक्षा कर रही है कि आयुक्त जामोद अपने कार्यकाल में इस भ्रष्ट प्रशासनिक ढांचे में कुछ सुधार लाते हैं या नहीं।

