विंध्य वसुंधरा शैलेन्द्र मिश्रा
रीवा जिले में डीएपी खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने में प्रशासन विफल – जिम्मेदार अधिकारियों की निष्क्रियता से किसान परेशान
रीवा, मध्य प्रदेश: जिले में अवैध व्यापार और कालाबाजारी की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। किसानों के लिए आवश्यक खाद और बीज जैसे संसाधनों की उपलब्धता पर अंकुश लगाते हुए कुछ अधिकारी एवं ठेकेदार अपने स्वार्थ को प्राथमिकता दे रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही और कालाबाजारी के कारण जिले के किसानों को डीएपी और यूरिया जैसे आवश्यक खाद महंगे दामों पर खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति खासतौर पर मनगवा तहसील में गंभीर है, जहां डीएपी खाद में सुपर फास्फेट दानेदार रखड़ की कालाबाजारी ने विकराल रूप धारण कर लिया है।
प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से खाद संकट
सम्भागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, एसडीओ और तहसीलदार थाना क्षेत्र में थाना प्रभारी जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा द्वारा सभी अवैध कार्यों में छापा मार की कार्यवाही कर कर सकते है। एवं अवैध व्यापार पर रोक लगाने का दायित्व पूर्ण कर सकते है। हालांकि, इनकी निष्क्रियता के कारण जिले में खाद के अवैध परिवहन और भंडारण का कारोबार जोरों पर है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में छः- छः से अधिक गाड़ियां अवैध रूप से खाद परिवहन कर रही हैं। स्थानीय नागरिकों और किसानों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद, न तो पुलिस और न ही कृषि विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई की है। अधिकारियों को कई बार वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया, लेकिन उनके द्वारा सिर्फ सांत्वना देने तक ही सीमित रहा गया, जिससे किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है।
डीएपी खाद की उपलब्धता न होने से किसान हो रहे प्रभावित
अक्टूबर से डीएपी खाद की भारी मांग होती है, जो कि रीवा के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में दी जाती है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकारी अनुबंधित पैक्स समितियों और प्राइवेट डीलरों को पीओएस मशीन से खाद वितरण करने का नियम है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इसके बावजूद, जिले में कालाबाजारी करने वाले प्राइवेट डीलरों के माध्यम से किसानों को ऊंचे दाम पर खाद खरीदने के लिए बाध्य किया जा रहा है। खाद की कमी के कारण किसान भुखमरी की स्थिति में पहुंचने की कगार पर हैं, जो आने वाले समय में खाद्यान्न संकट को जन्म दे सकता है।
वर्तमान राजनीतिक स्थिति भी एक बड़ा कारण
2004 के पहले तक राजनेता जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े रहते थे और उनकी समस्याओं को हल करने का प्रयास करते थे। लेकिन अब अधिकांश जनप्रतिनिधि जनता के बजाय अपने निजी स्वार्थों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ठेकेदार, रिटायर्ड कर्मचारी, और सावंतवादी लोग सत्ता में आकर केवल अपने हितों की पूर्ति में लगे हुए हैं, जिससे जनता की परेशानियों का समाधान नहीं हो पा रहा है। इसी का परिणाम है कि रीवा जिले में खाद और बीज की कालाबाजारी पर कोई रोक नहीं लग पाई है, और जनता को उनके भरोसे छोड़ दिया गया है।
प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता
सरकार और विपक्ष दोनों को इस मुद्दे पर ध्यान देना चाहिए और किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए। किसानों की समस्याओं को उचित मंच पर उठाना जरूरी है ताकि खाद और बीज का उचित वितरण हो सके और किसानों को महंगे दामों पर खाद खरीदने के लिए मजबूर न होना पड़े। अगर जल्द ही इन व्यापारियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही नहीं की गई, तो जनता का आक्रोश बढ़ेगा, और इसका खामियाजा न केवल वर्तमान सरकार को बल्कि विपक्ष को भी भुगतना पड़ेगा।
जनता की मांग – निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई
रीवा के किसानों ने मांग की है कि जिला प्रशासन और सम्बंधित अधिकारियों के कार्यों की गोपनीय सीआईडी जांच की जाए ताकि कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा सके। इसके अलावा, जिन अधिकारियों के क्षेत्र में इस प्रकार के अवैध व्यापार हो रहे हैं, उनके खिलाफ भी सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। केवल तब ही भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है और किसानों को राहत प्रदान की जा सकती है।
रीवा जिले में अगर इसी प्रकार भ्रष्टाचार और कालाबाजारी को प्रोत्साहन मिलता रहा तो यह न केवल कृषि उत्पादकता पर प्रभाव डालेगा, बल्कि किसानों के लिए भीषण आर्थिक संकट भी पैदा कर सकता है। यदि इन अधिकारियों और व्यापारियों की आय पर इनकम टैक्स विभाग द्वारा जांच की जाए, तो काले धन का रहस्य उजागर हो सकता है। जनता का आक्रोश दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, और यदि अब भी कठोर कदम नहीं उठाए गए तो यह जन आंदोलन का रूप ले सकता है।

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