रीवा जिले के गढ़ और उसके आस-पास के इलाकों में वर्षों से चले आ रहे अतिक्रमण के कारण आम जनता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। समाजसेवी और अधिवक्ता प्रभात चंद्र द्विवेदी ने प्रशासनिक उदासीनता और रसूखदारों के खुलेआम अतिक्रमण पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि सरकारी जमीन और सड़कों पर अवैध कब्जा इतना बढ़ चुका है कि यह क्षेत्र कभी भी बड़ी दुर्घटनाओं का गवाह बन सकता है।
अभिलेखों में हेराफेरी, रसूखदारों का कब्जा
सूत्रों के अनुसार, राजस्व विभाग के अभिलेखों में हेराफेरी कर कई स्थानों पर अवैध कब्जा दर्ज किया गया है। कई सरकारी भवनों और मुख्य सड़कों के नक्शे अधूरे छोड़े गए हैं, जिसका लाभ उठाकर प्रभावशाली लोग सरकारी जमीन पर दुकानें संचालित कर रहे हैं। सबसे अधिक परेशानी गढ़ से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग-27 और नई गाड़ी मार्ग पर देखी जा रही है, जहां दुकानें और निर्माणों ने सड़क को संकीर्ण बना दिया है।
अभियान में भेदभाव, रसूखदारों को राहत
प्रभात चंद्र द्विवेदी का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की ओर से किए गए प्रयासों में गरीब और कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जाता है, जबकि राजनीतिक प्रभाव वाले रसूखदार लोग बेखौफ अवैध कब्जे जारी रखे हुए हैं। इनमें कुछ स्थानीय नेता और सत्ताधारी दल से जुड़े लोग भी शामिल हैं। इन रसूखदारों पर किसी तरह की कार्यवाही न होने से आम लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
सड़क सुरक्षा पर खतरा, जनता को मुश्किलें
अतिक्रमण के कारण गढ़ क्षेत्र में पैदल यात्रियों, खासकर स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं को सड़क पार करना मुश्किल हो गया है। गढ़ के अलावा सुहागी, मैग्मा, रघुनाथगंज और देवतालाब जैसे क्षेत्रों में भी सड़कों के किनारे अवैध दुकानें लगाई गई हैं, जिससे स्थानीय लोगों को असुविधा हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है।
प्रशासन की उदासीनता पर सवाल
जनता का कहना है कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। अतिक्रमण के कारण सड़कें संकीर्ण होती जा रही हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते खतरे के बावजूद परिवहन विभाग, बीमा कंपनियां और सरकार इस मुद्दे पर विचार नहीं कर रही हैं।
समस्या के समाधान की अपील
समाजसेवी संगठनों और स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण के खिलाफ सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन और संबंधित विभाग इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, तो न केवल अतिक्रमण पर नियंत्रण पाया जा सकता है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकती है।

