रीवा/मऊगंज। खाद की गुणवत्ता और कालाबाजारी का मुद्दा आज रीवा और मऊगंज जिलों में गंभीर रूप ले चुका है। किसानों को गुणवत्तापूर्ण खाद देने के दावों के बावजूद, क्षेत्र में डीएपी खाद और अन्य उर्वरकों में मिलावट तथा काला बाजारी का खेल बदस्तूर जारी है। प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता और विभागीय उदासीनता के कारण किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
मिलावट की समस्या पर प्रशासन की नजरअंदाजी
रीवा और मऊगंज में खाद की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का जवाब अभी तक कृषि विभाग से नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि खाद की आपूर्ति प्रक्रिया पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। न तो यह जानकारी सार्वजनिक की जा रही है कि किन कंपनियों की कितनी खाद आई है और न ही यह कि कौन से दुकानों के माध्यम से किसे वितरित की जा रही है।
खुलेआम हो रही कालाबाजारी
किसानों के मुताबिक खुलेआम मिलावटी खाद बिकने से उनके हितों पर कुठाराघात हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद के नाम पर डीएपी में सुपर फास्फेट और अन्य मिलावटी पदार्थों का मिश्रण हो रहा है, जिससे फसल की पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित होने की संभावना है। किसान कई महीनों से इसकी शिकायत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर से अंधी और बहरी भूमिका निभा रहा है।
अधिकारी जांच के बजाय मौन
खाद की गुणवत्ता को लेकर जांच की मांग पर अधिकारी मौन साधे बैठे हैं। रीवा और मऊगंज जिले के किसानों ने आरोप लगाया है कि कृषि विभाग द्वारा अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। न ही खाद की दुकानों से नमूने लेकर उनका परीक्षण किया गया है। यह स्थिति प्रशासनिक प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े करती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में डिपो का अभाव
रीवा जिले के ग्रामीण अंचलों में खाद वितरण के लिए कोई डिपो नहीं है, जिसके कारण दूर-दराज के इलाकों तक खाद भेजने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में वितरण की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। किसानों का मानना है कि अगर वितरण की प्रक्रिया और खाद की गुणवत्ता का रजिस्टर रखा जाए, तो मिलावट का पर्दाफाश हो सकता है।
किसानों पर आर्थिक मार
डीएपी खाद में मिलावट से किसानों की आर्थिक स्थिति पर भारी असर पड़ने का खतरा है। मिलावटी खाद का इस्तेमाल कर किसान फसल की उपज में गिरावट का सामना कर सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता की खाद न मिलने से फसल उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे किसान आर्थिक तंगी में आ सकते हैं।
मांग: निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित हो
किसानों की मांग है कि प्रशासन शीघ्र ही खाद की आपूर्ति और गुणवत्ता की गहन जांच कर यह सुनिश्चित करे कि उन्हें मिलावटी नहीं बल्कि सही और गुणवत्तापूर्ण खाद मिले। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि खाद के वितरण में पारदर्शिता बनाए रखे और सभी डिपो में खाद उपलब्ध हो।
इस तरह की खुली कालाबाजारी और प्रशासनिक उदासीनता का दुष्प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है, जो हमारे देश की कृषि अर्थव्यवस्था का मूल आधार हैं।

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