2 दिसंबर से धान खरीदी शुरू: क्या सरकार और प्रशासन बिचौलियों पर लगाम कसने में सक्षम होगा?
रीवा और मऊगंज जिलों समेत मध्य प्रदेश में 2 दिसंबर 2024 से धान खरीदी प्रक्रिया शुरू हो रही है। सरकार का दावा है कि इस बार किसानों को उनके फसलों का उचित मूल्य दिया जाएगा और प्रक्रिया पारदर्शी होगी। लेकिन, सूत्रों के अनुसार, धान खरीदी के नाम पर काले धन के उपयोग और बिचौलियों के सक्रिय होने की खबरें पहले से ही चर्चा में हैं।
बिचौलियों और व्यापारियों का खेल
यह आरोप लगाया जा रहा है कि बड़े अधिकारी, नेता, और व्यापारी मिलकर फर्जी पंजीयन के जरिए सरकारी योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं। कुछ बिचौलिए पहले ही किसानों से धान 1200 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदकर गोदामों में जमा कर चुके हैं। अब यह धान सरकार को 2000 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की दर पर बेची जाएगी।
किसानों को सिर्फ 100-200 रुपये प्रति क्विंटल का फायदा हो रहा है, जबकि असल मुनाफा व्यापारी और बिचौलिए कमा रहे हैं। यह भी खबर है कि कुछ कर्मचारी और अधिकारी इस खेल में शामिल हैं। खरीदी केंद्रों पर धान का वजन और गुणवत्ता मैनिपुलेट कर सरकारी खातों में बड़ी मात्रा में धन जमा किया जा रहा है।
सीमावर्ती जिलों से धान की अवैध बिक्री
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, मिर्जापुर और बनारस से सटे मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों, जैसे रीवा और सतना, में धान की अवैध बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है। इस धान को मध्य प्रदेश की उत्पादन श्रेणी में दिखाकर सरकारी खरीद में शामिल किया जा रहा है। यह न केवल मध्य प्रदेश के किसानों के अधिकारों को छीन रहा है, बल्कि सरकार की छवि पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी
खरीदी प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल उठ रहे हैं:
1. क्या खरीदी केंद्रों पर धान का सही वजन और गुणवत्ता जांच सुनिश्चित की जाएगी?
2. क्या ट्रैक्टरों और वाहनों से रात में गुप्त रूप से बेचे जा रहे धान की जांच होगी?
3. क्या जिन कर्मचारियों और व्यापारियों पर आरोप हैं, उन पर सख्त कार्रवाई होगी?
खरीदी केंद्रों के पास बिचौलियों की गतिविधियां और गोदामों से हो रही धान की बिक्री पर नजर रखने की जिम्मेदारी खुफिया विभाग और प्रशासन की है। लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई होती नजर नहीं आ रही।
क्या इस बार कुछ बदलेगा?
पिछले वर्षों में भी धान खरीदी में ऐसी अनियमितताओं की खबरें आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी कार्रवाई हुई। इस बार सवाल यह है कि क्या प्रशासन बिचौलियों पर लगाम कसने और किसानों को उनका हक दिलाने में सफल होगा?
किसानों की उम्मीदें और सरकार की चुनौती
धान खरीदी की सफलता सरकार की पारदर्शिता और प्रशासन की क्षमता पर निर्भर करती है। अगर बिचौलियों और अनियमितताओं पर लगाम नहीं लगाई गई, तो सरकार की साख पर गहरा असर पड़ सकता है।
अब देखना यह है कि रीवा और मऊगंज जिलों में इस बार प्रशासन कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है और किसानों को न्याय दिलाने में कितना सफल होता है।

