विंध्य वसुंधरा समाचार रीवा मध्यप्रदेश
सीधी: रीवा लोकायुक्त टीम ने मझौली तहसील में नायब तहसीलदार को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। खासतौर पर राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी रिश्वतखोरी के मामलों में सबसे ज्यादा सामने आते रहे हैं। इसी कड़ी में सीधी जिले में लोकायुक्त पुलिस रीवा ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए मझौली के नायब तहसीलदार बाल्मिक प्रसाद को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
घटना का पूरा विवरण
शिकायतकर्ता प्रवेश शुक्ला ने अपनी जमीन के नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय मझौली में आवेदन किया था। इस आवेदन पर कार्रवाई के लिए नायब तहसीलदार बाल्मिक प्रसाद ने शिकायतकर्ता से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान होकर प्रवेश शुक्ला ने रीवा लोकायुक्त एसपी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई।
लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच और सत्यापन के बाद योजना तैयार की। 21 दिसंबर को लोकायुक्त की 12 सदस्यीय टीम ने नायब तहसीलदार को रिश्वत की पहली किस्त 25 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।
कार्यवाही के दौरान स्थिति
लोकायुक्त टीम की अचानक हुई इस कार्रवाई से नायब तहसीलदार बाल्मिक प्रसाद पूरी तरह से घबरा गए। उन्होंने अपने चेहरे को फाइलों और आलमारी के पीछे छुपाने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने उन्हें रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद नायब तहसीलदार को सीधी मुख्यालय ले जाया गया, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। इस दौरान उनके बयान दर्ज किए गए और रिश्वत की जब्त राशि को प्रमाण के रूप में संग्रहित किया गया।
लोकायुक्त टीम की सक्रियता
यह कार्रवाई कार्यवाहक उप पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र कुमार के नेतृत्व में 12 सदस्यीय लोकायुक्त टीम द्वारा अंजाम दी गई। टीम ने पूरी योजना को गोपनीयता के साथ अंजाम दिया और आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने में सफलता हासिल की।
रिश्वतखोरी की जड़ें गहरी
राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी तहसीलदार, पटवारी, और अन्य अधिकारी रिश्वतखोरी में लिप्त पाए गए हैं। बावजूद इसके, रिश्वतखोरी के मामलों में कोई कमी नहीं आई है। सीधी की इस घटना ने एक बार फिर राजस्व विभाग में फैले भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।
अब
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश
लोकायुक्त की इस कार्रवाई से न केवल रिश्वतखोर अधिकारियों को चेतावनी मिली है, बल्कि आम जनता को भी उम्मीद बंधी है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसी कार्रवाइयां जारी रहेंगी। मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

