धान खरीदी: किसानों का शोषण, प्रशासन की नाकामी और अव्यवस्थाओं की कहानी
मध्य प्रदेश के रीवा और नवगठित जिला मऊगंज में धान खरीदी का कार्य प्रारंभ हो चुका है, लेकिन इस प्रक्रिया ने किसानों को राहत देने के बजाय उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। जहां सरकार किसानों को उचित मूल्य देने की बात करती है, वहीं हकीकत में खरीदी केंद्रों पर फैली अव्यवस्थाएं और भ्रष्टाचार किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गए हैं।
धान खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्थाओं का बोलबाला
रीवा और मऊगंज जिलों के अधिकांश खरीदी केंद्रों पर बदइंतजामी और लचर प्रबंधन किसानों की मुश्किलों को बढ़ा रहा है। यहां की प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं
1. पल्लेदारों की कमी:
खरीदी केंद्रों पर पल्लेदारों की भारी कमी के कारण धान का तोल समय पर नहीं हो पा रहा है। किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी रोजमर्रा की गतिविधियां बाधित हो रही हैं।
2. पार्किंग की समस्या:
अधिकांश केंद्रों पर पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। किसानों के ट्रैक्टर और अन्य वाहनों की कतारें सड़कों पर लंबी होती जा रही हैं, जिससे यातायात जाम की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
3. खुले में इंतजार:
सर्दियों के मौसम में किसान मजबूरन खुले आसमान के नीचे ट्रैक्टरों में रात बिताने को विवश हैं। ठंड और कुहासे के कारण उनकी जान को भी खतरा बना हुआ है।
4. अलाव और पानी की अनुपलब्धता
खरीदी केंद्रों पर ठंड से बचने के लिए अलाव की कोई व्यवस्था नहीं है। पीने के पानी तक की सुविधा नहीं है, शौच कोई व्यवस्था नहीं स्वक्षता अभियान की उड़ रही धज्जियां जिससे किसानों की स्थिति दयनीय हो रही है।
खरीदी केंद्रों पर भ्रष्टाचार का बोलबाला
किसानों को न केवल अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें खुलेआम भ्रष्टाचार का शिकार भी होना पड़ रहा है:
1. धन उगाही:
ट्रैक्टर जल्दी खाली करने के नाम पर किसानों से 1,000 से 1,500 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। शासन के नियमों का हवाला दे कर खुली टाली में धान न लाने पर बोरी में धान होने के कारण पैसे की उगाही की जाती है।
2. प्राथमिकता की कीमत:
सेवा शुल्क के नाम पर किसानों से वसूली की जा रही है। दबंग प्रबंधक पैसे लेकर किसानों के ट्रैक्टरों को प्राथमिकता देते हैं।
3. व्यापारियों का बोलबाला:
व्यापारियों को नियमों का उल्लंघन कर फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि किसान नियमों का पालन करते हुए भी लंबी कतारों में खड़े रहते हैं।
अनुचित वसूली और शोषण के मामले
खरीदी प्रक्रिया में किसानों से हर स्तर पर शोषण हो रहा है:
1. सैंपलिंग के नाम पर चोरी:
प्रत्येक चक्कर पर किसानों से 2 किलो धान जबरन लिया जाता है।
2. बोरियों का शुल्क:
प्रति बोरी 5-7 रुपये तक अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है।
3. भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत:
अधिकारी इस भ्रष्टाचार को रोकने के बजाय इसे बढ़ावा दे रहे हैं।
किसानों की अनकही व्यथा
किसान अपनी मेहनत और खून-पसीने से उपजाई फसल को बेचने के लिए केंद्रों पर आते हैं। चार महीने तक बारिश, कीचड़ और आवारा पशुओं से लड़ते हुए उन्होंने अपनी फसल तैयार की होती है। लेकिन जब बिक्री का समय आता है, तो उन्हें भ्रष्टाचार, अव्यवस्थाओं और प्रशासन की लापरवाही का सामना करना पड़ता है।
सरकार और विपक्ष की भूमिका पर सवाल
सरकार और प्रशासन किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। विपक्ष भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है। जनप्रतिनिधि किसानों की समस्याओं को समझने के बजाय अपनी सुख-सुविधाओं में लीन हैं।
समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
समाज और प्रशासन को किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
सुधार के सुझाव:
1. खरीदी केंद्रों पर पर्याप्त पल्लेदारों की नियुक्ति की जाए।
2. ट्रैक्टरों के लिए उचित पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
3. ठंड में अलाव और पानी की समुचित व्यवस्था हो।
4. भ्रष्टाचार रोकने के लिए सख्त निगरानी और कार्रवाई की जाए।
5. किसानों को किसी भी प्रकार की अवैध वसूली से बचाने के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया जाए।
कानूनी कार्रवाई:
भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों और प्रबंधकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
धान खरीदी केंद्रों पर व्याप्त अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार ने किसानों की समस्याओं को कई गुना बढ़ा दिया है। प्रशासन और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिले और उनका शोषण बंद हो।
यह रिपोर्ट प्रशासन और सरकार के लिए एक चेतावनी है कि अगर जल्द ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति किसानों के लिए एक बड़े संकट का कारण बन सकती है। किसानों की आवाज बनकर, यह लेख उन तक यह संदेश पहुंचाने का प्रयास करता है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनका समाधान निकाला जाए।

