राष्ट्रीय राजमार्ग पर टोल प्लाजा की अव्यवस्था: मरीजों और यात्रियों के लिए बनी गंभीर समस्या
रीवा जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित टोल प्लाजा पर भारी अव्यवस्था और लापरवाही के कारण यात्रियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कैनिंग मशीनों की धीमी कार्यप्रणाली के चलते लोगों को 15 से 20 मिनट तक बैरियर पर इंतजार करना पड़ता है। इस देरी से यात्रियों का समय तो बर्बाद होता ही है, साथ ही आपातकालीन स्थितियों में सफर करने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मरीजों की जिंदगी दांव पर
रीवा के अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के चलते गंभीर मरीजों को अक्सर प्रयागराज, बनारस या अन्य बड़े शहरों में रेफर किया जाता है। ऐसे में तेज गति से सफर करना उनके जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन टोल प्लाजा पर होने वाली देरी मरीजों और उनके परिजनों के लिए बड़ी बाधा बनती है। लंबी कतारों और धीमी स्कैनिंग प्रक्रिया के कारण कई बार मरीजों की स्थिति और बिगड़ जाती है।
कर्मचारियों का असंवेदनशील रवैया
यात्रियों का आरोप है कि जब वे कर्मचारियों से देरी को लेकर सवाल करते हैं, तो उन्हें असंवेदनशील जवाब मिलता है। कर्मचारियों का कहना होता है, "कट रहा है, जब कट जाएगा तब जाओ।" इस प्रकार के गैर-जिम्मेदाराना रवैये से यात्रियों का धैर्य टूट रहा है। जिन परिवारों के सदस्य आपातकालीन स्थिति में सफर कर रहे होते हैं, उनके लिए यह व्यवहार मानसिक तनाव को और बढ़ा देता है।
लंबे जाम और तनावपूर्ण माहौल
टोल प्लाजा पर स्कैनिंग में देरी के कारण अक्सर लंबा जाम लग जाता है। यह स्थिति न केवल यात्रियों को समय की बर्बादी झेलने पर मजबूर करती है, बल्कि ट्रैफिक जाम के कारण सड़क पर असुरक्षित माहौल भी बनता है। कई बार जाम के चलते एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी फंसी रह जाती हैं, जिससे गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
मारपीट और धमकी की घटनाएं
टोल प्लाजा पर अव्यवस्था के कारण यात्रियों और कर्मचारियों के बीच झगड़े और हिंसा की घटनाएं भी सामने आई हैं। शिकायत करने पर कर्मचारियों का व्यवहार आक्रामक हो जाता है और कई बार यात्रियों के साथ मारपीट तक की नौबत आ जाती है। परिवार के साथ सफर कर रहे लोग इन स्थितियों के कारण चुपचाप सब सहने को मजबूर हो जाते हैं, क्योंकि वे अपने प्रियजनों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं।
नियमों की अनदेखी
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने टोल प्लाजा पर यातायात सुगम और व्यवस्थित करने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रहण (FASTag) के माध्यम से तेज और पारदर्शी प्रक्रिया लागू करने पर जोर दिया गया है। लेकिन रीवा जिले के टोल प्लाजा पर इन नियमों की अनदेखी स्पष्ट दिखाई देती है। यहां केवल मनमानी वसूली होती है, और यात्रियों की सुविधा का कोई ध्यान नहीं रखा जाता।
समस्या का समाधान आवश्यक
रीवा जिले के नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि:
1. स्कैनिंग मशीनों को उन्नत और तेज किया जाए, ताकि यात्रियों को लंबा इंतजार न करना पड़े।
2. कर्मचारियों को यात्रियों के प्रति संवेदनशीलता और शालीनता से पेश आने की सख्त हिदायत दी जाए।
3. टोल प्लाजा पर हो रही अव्यवस्था और हिंसा की घटनाओं की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
4. FASTag प्रणाली को सुचारु रूप से लागू किया जाए ताकि ट्रैफिक जाम से बचा जा सके।
जनता की उम्मीदें और प्रशासन की जिम्मेदारी
राष्ट्रीय राजमार्ग पर सुगम और सुरक्षित यातायात हर नागरिक का अधिकार है। टोल प्लाजा पर व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए प्रशासन को तत्परता से कदम उठाने होंगे। यदि यह समस्या जल्द हल नहीं की गई, तो आम जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। यह न केवल प्रशासन की छवि पर प्रभाव डालेगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को भी खतरे में डाल देगा।


