किसानों के संघर्ष के आगे झुका प्रशासन, लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ चक्का जाम
रीवा, 12 दिसंबर 2024
मध्य प्रदेश के रीवा जिले तहसील सिरमौर अंतर्गत में धान खरीदी केंद्रों को लेकर चल रहे विवाद ने गुरुवार को बड़ा मोड़ ले लिया, जब देवास चौराहे पर किसानों और जनप्रतिनिधियों ने धान खरीदी केंद्र की मांग को लेकर सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चक्का जाम कर दिया। यह आंदोलन जनपद सदस्य अखिलेश पटेल के नेतृत्व में हुआ, जिसमें क्षेत्र के सरपंचों, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया।
देवास और उसके आसपास के गांवों में किसान लंबे समय से अपनी फसल बेचने के लिए खरीदी केंद्र की मांग कर रहे थे। केंद्र के अभाव में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूरस्थ स्थानों पर जाना पड़ता था, जिससे न केवल समय की बर्बादी हो रही थी, बल्कि उन्हें अतिरिक्त परिवहन लागत का बोझ भी उठाना पड़ रहा था। प्रशासन से कई बार अपील करने के बावजूद, समस्या का समाधान नहीं हुआ। निराश किसानों ने जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर चक्का जाम करने का निर्णय लिया।
आंदोलन में हजारों की भागीदारी
गुरुवार सुबह से ही देवास चौराहे पर बड़ी संख्या में किसान और जनप्रतिनिधि जुट गए। जनपद सदस्य अखिलेश पटेल, सरपंच देवास और खरहरी, और अन्य प्रमुख किसान नेताओं ने धरने का नेतृत्व किया। किसानों के समर्थन में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश प्रवक्ता विश्वनाथ पटेल चोटीवाला ने भी धरना स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा था, लेकिन चक्का जाम की वजह से यातायात पूरी तरह से बाधित हो गया।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और समाधान
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी सिरमौर तहसीलदार अरुण यादव और जनपद अध्यक्ष गंगेव विकास तिवारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर गंभीरता दिखाई। अंततः प्रशासन ने किसानों को लिखित रूप में यह आश्वासन दिया कि अगले दो दिनों के भीतर देवास में धान खरीदी केंद्र B.O.T केंद्र कपूरी स्थापना की जाएगी।
लिखित आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, और देवास चौराहे पर यातायात फिर से बहाल हुआ। आंदोलन समाप्ति के समय किसान नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि समयसीमा के भीतर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे दोबारा बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
किसानों की चेतावनी और एकजुटता
किसानों ने कहा कि उनकी फसलें उनकी आजीविका का आधार हैं, और प्रशासन को उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन उनके संघर्ष का पहला कदम था, और भविष्य में भी वे अपनी मांगों के लिए एकजुट रहेंगे।
क्षेत्रीय राजनीति में आंदोलन की गूंज
इस आंदोलन ने न केवल प्रशासन को झकझोर दिया, बल्कि क्षेत्रीय राजनीति में भी हलचल मचा दी। जनप्रतिनिधियों ने किसानों के साथ खड़े होकर यह साबित कर दिया कि वे अपने क्षेत्र की समस्याओं को हल करने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। यह आंदोलन किसानों और जनप्रतिनिधियों की एकजुटता और संघर्षशीलता का प्रतीक बन गया है।
जनप्रतिनिधि एवं समस्त किसान, देवास, खरहरी और आसपास के गांव।
इस आंदोलन के बाद किसानों ने एक बार फिर अपने अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से स्थापित किया है। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि किसानों की मांगों को नजरअंदाज करना अब संभव नहीं।


