रीवा मध्यप्रदेश : अवैध कारोबार का गढ़, प्रशासन की नाकामी या मिलीभगत?
विंध्य वसुंधरा समाचार एस. एन. पाण्डेय
रीवा जिला, जो कभी अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता था, आज नशीले पदार्थों की तस्करी, चंदन के पेड़ों के कटान, खनिज तस्करी और पशु तस्करी जैसे अपराधों का केंद्र बनता जा रहा है। अवैध कारोबार का यह नेटवर्क न केवल जिले की आर्थिक और सामाजिक संरचना को खोखला कर रहा है, बल्कि प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
नशीले पदार्थों की तस्करी: रीवा बना माफिया का केंद्र
रीवा जिला और उसके आसपास के इलाकों में नशीले पदार्थों का कारोबार तेजी से बढ़ा है। यह न केवल युवाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि अपराध के एक बड़े जाल को जन्म दे रहा है।
ब्राउन शुगर (सफेद शक्कर):
झारखंड और ओडिशा से लाकर "ब्राउन शुगर", जिसे स्थानीय तौर पर "सफेद शक्कर" कहा जाता है, रीवा के विभिन्न इलाकों में बेची जा रही है। यह पदार्थ उच्च कीमत पर बिकता है और इसे सिगरेट के साथ पीने का चलन बढ़ रहा है।
गांजा और अन्य नशीले पदार्थ:
ओडिशा और छत्तीसगढ़ से गांजे के बड़े-बड़े पैकेट मंगवाए जाते हैं। इसे विशेष मशीनों से दबाकर छोटे आकार के पैकेट में परिवर्तित किया जाता है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश से नशीली सिरप और गोलियां भी तस्करी के जरिए रीवा पहुंचाई जाती हैं।
कैसे होता है तस्करी का नेटवर्क संचालित?
तस्कर हर थाने और सीमा पर पूरी जानकारी रखते हैं कि कहां जांच हो रही है और कहां नहीं। कुछ स्थानीय लोगों और अधिकारियों की मिलीभगत से यह कारोबार फल-फूल रहा है।
चंदन की लकड़ी: रीवा का जंगल चंदनविहीन
कभी चंदन के पेड़ों के लिए प्रसिद्ध रीवा जिले के जंगल अब खाली हो चुके हैं।
तस्करों ने जिले के जंगलों से चंदन के पेड़ों का अवैध कटान कर उन्हें बाहर भेज दिया।
यह तस्करी बाहरी माफिया और स्थानीय सूत्रों के माध्यम से संचालित होती है।
प्रशासन की नाकामी और भ्रष्टाचार के कारण यह कीमती लकड़ी अब रीवा में न के बराबर बची है।
पशु तस्करी: हर दिन सैकड़ों जानवरों की अवैध आवाजाही
रीवा और उसके आसपास के क्षेत्रों में पशुओं, खासकर भैंस और बकरियों की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है।
कैसे होती है तस्करी?
मऊगंज, सीधी और सिंगरौली के रास्ते तस्कर बड़े और छोटे ट्रकों में पशुओं को ठूंसकर उत्तर प्रदेश तक ले जाते हैं।
कौन हैं जिम्मेदार?
इन गाड़ियों से अवैध वसूली की जाती है। छोटे वाहनों से ₹1000 और बड़े ट्रकों से ₹5000 प्रति चक्कर वसूला जाता है।
विशेष तस्करी दिन:
मंगलवार और शनिवार को तस्करी का खास दिन माना जाता है, क्योंकि इन दिनों जांच कम होती है।
खनिज तस्करी: बालू और गिट्टी का अवैध खनन
रीवा जिले में बालू और गिट्टी का अवैध खनन और परिवहन एक आम बात हो चुकी है।
पर्यावरण को नुकसान:
अनियंत्रित खनन ने जिले के पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाया है।
सड़कों की बदहाली:
भारी ट्रकों की आवाजाही से सड़कों की हालत खस्ताहाल हो चुकी है। जिन सड़कों की क्षमता 20 टन है, वहां 50-60 टन वजन वाले ट्रक धड़ल्ले से गुजरते हैं।
भ्रष्टाचार और दहशत का खेल
अवैध कारोबार के इस जाल में प्रशासन और पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में है।
1. मिलीभगत और सेवा शुल्क:
हर अवैध गतिविधि से जुड़े व्यक्ति को एक तय राशि देनी पड़ती है, जिसे "सेवा शुल्क" के नाम पर वसूला जाता है।
2. झूठे मुकदमे और धमकियां:
विरोध करने वालों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है।
अगर कोई व्यक्ति ज्यादा विरोध करता है, तो उसे शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाया जाता है।
3. पत्रकारों पर हमला:
जो पत्रकार या सामाजिक कार्यकर्ता इस अवैध तंत्र को उजागर करने की कोशिश करते हैं, उन्हें धमकियां दी जाती हैं या उनके साथ मारपीट की जाती है।
ग्रामीण इलाकों में खौफ और चुप्पी
ग्रामीण क्षेत्रों में तस्करों का खौफ इतना बढ़ गया है कि लोग इस पर बात करने से भी डरते हैं।
तस्करों के पास अपने लोगों की एक टीम होती है, जो किसी भी विरोध करने वाले को दबाने का काम करती है।
स्थानीय सूत्र बताते हैं कि इन अवैध गतिविधियों से जुड़े लोग हर महीने लाखों रुपये कमा रहे हैं, जबकि आम जनता इससे लगातार प्रभावित हो रही है।
समस्या का समाधान: क्या किया जा सकता है?
रीवा जिले को इन अवैध गतिविधियों से बचाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:
1. सख्त कानून-व्यवस्था लागू करना:
सीमाओं पर सख्त निगरानी और नियमित जांच।
हर जिले में एक विशेष टास्क फोर्स की नियुक्ति।
2. प्रशासनिक जवाबदेही:
अवैध गतिविधियों में शामिल अधिकारियों की पहचान और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
एक स्वतंत्र जांच एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराई जाए।
3. जन-जागरूकता अभियान:
नशीले पदार्थों और अवैध गतिविधियों के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान।
युवाओं को नशे से बचाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं।
4. पर्यावरण संरक्षण:
चंदन के पेड़ों की पुनःस्थापना के लिए विशेष योजनाएं लागू की जाएं।
खनिज खनन पर रोक लगाने के लिए तकनीकी उपाय अपनाए जाएं।
5. सूचना देने वालों की सुरक्षा:
अवैध गतिविधियों की जानकारी देने वालों को सुरक्षा और उचित पुरस्कार प्रदान किए जाएं।
रीवा को बचाना है, तो कदम उठाना होगा
रीवा जिले की मौजूदा स्थिति न केवल प्रशासनिक नाकामी का नतीजा है, बल्कि समाज की उदासीनता भी इसमें जिम्मेदार है। अगर इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में रीवा एक ऐसा क्षेत्र बन जाएगा, जहां अपराध और अवैध गतिविधियां ही मुख्य पहचान बनेंगी।
इस समय आवश्यकता है कि प्रशासन, समाज और मीडिया एकजुट होकर इन समस्याओं के खिलाफ ठोस कदम उठाएं, ताकि रीवा फिर से अपनी खोई हुई गरिमा को प्राप्त कर सके।
(यह लेख समाज और प्रशासन दोनों के लिए एक चेतावनी है कि रीवा जिले को बचाने के लिए जल्द से जल्द ठोस कदम उठाए जाएं।)

