रीवा में चेक बाउंस मामला: 6 माह की सजा और 10.15 लाख रुपये जुर्माने का ऐतिहासिक फैसला
रीवा मध्यप्रदेश, 14 दिसंबर 2024: जिला न्यायालय रीवा ने चेक बाउंस के गंभीर मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। श्रीमान न्यायिक दंडाधिकारी अक्षत तलाय ने मोहम्मद रियाज बनाम संतोष पटेल मामले में अभियुक्त संतोष पटेल (पिता: राजमणि पटेल, निवासी: सलैया, जिला रीवा) को 6 महीने के सश्रम कारावास और 10.15 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
मामले का विवरण:
मोहम्मद रियाज ने 2019 में अभियुक्त संतोष पटेल को 7 लाख रुपये उधार दिए थे। लेन-देन की पुष्टि के लिए संतोष पटेल ने अपने बैंक खाते का चेक मोहम्मद रियाज को सौंपा। परिवादी ने चेक को नियमानुसार समय पर अपने बैंक में जमा किया, लेकिन चेक अपर्याप्त निधि के कारण डिसऑनर हो गया।
नोटिस भेजा गया, पर जवाब नहीं:
चेक बाउंस होने के बाद, मोहम्मद रियाज ने मौखिक रूप से और अधिवक्ता के माध्यम से विधिक नोटिस भेजकर संतोष पटेल से उधार राशि वापस करने की मांग की। लेकिन अभियुक्त ने राशि लौटाने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
न्यायालय में मामला दायर:
अभियुक्त के इनकार करने पर, मोहम्मद रियाज ने 2019 में जिला न्यायालय रीवा में परिवाद दायर किया। मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 138 (निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट) के तहत दर्ज किया गया।
न्यायालय की सुनवाई और फैसला:
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों के साक्ष्य और गवाहों को सुना। अभियोजन पक्ष ने यह साबित किया कि अभियुक्त ने जानबूझकर चेक जारी किया, जबकि उसके खाते में पर्याप्त धनराशि नहीं थी।
13 दिसंबर 2024 को न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए कहा:
"चेक बाउंस जैसे मामलों से समाज में वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता को ठेस पहुंचती है। ऐसे मामलों में दोषियों को सजा देना आवश्यक है ताकि वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया में विश्वास बहाल हो।"
अभियुक्त को दी गई सजा:
1. सश्रम कारावास: 6 महीने का सश्रम कारावास।
2. अर्थदंड: 10.15 लाख रुपये का जुर्माना।
यदि अभियुक्त अर्थदंड का भुगतान नहीं करता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
परिवादी की ओर से पैरवी:
मोहम्मद रियाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कुलदीप सिंह सोमवंशी ने पैरवी की। श्री सोमवंशी ने कहा कि न्यायालय का यह फैसला न्याय और पारदर्शिता की मिसाल है। उन्होंने कहा, "यह निर्णय उन सभी लोगों के लिए सख्त संदेश है जो वित्तीय लेन-देन के दौरान अपनी जिम्मेदारियों से भागते हैं।"
सजा का व्यापक महत्व:
चेक बाउंस के इस मामले में सजा न केवल अभियुक्त के लिए एक दंड है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है कि वित्तीय अनुशासन को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया:
इस फैसले को कानूनी विशेषज्ञों ने सराहा है। उनका मानना है कि यह फैसला उन मामलों में न्याय का प्रतीक है, जहां लोग उधार लेकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश करते हैं।

